27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हंगरी: बेघर लोगों के सड़क पर रात बिताने पर सरकार ने लगाई रोक

सरकार इससे पहले भी एक कानून पास करके सड़क पर रात बिताने वाले लोगों पर जुर्माने का प्रावधान कर चुकी है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Navyavesh Navrahi

•

Updated: 15 Oct 2018, 4:56 PM IST

hungary

हंगरी: बेघर लोगों के सड़क पर रात बिताने पर सरकार ने लगाई रोक

दुनिया में भारत समेत कई ऐसे देश हैं, जहां पर बेघर लोगों को सड़क पर रात बितानी पड़ती है। किंतु यूरोप के देश हंगरी ने ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक कानून बनाया है। जिसके अनुसार बेघर लोगों के सड़क पर रात बिताने पर रोक लगा दी है।

प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन सरकार की ओर से लाया गया कानून लागू होने के बाद देश में सड़कों पर सोना और रात बिताना प्रतिबंधित हो गया है। जबकि आलोचकों ने सरकार के इस कानून को ‘क्रूर’ बताया है।

पेरिस जलवायु समझौते से बाहर आने के बाद बोले ट्रंप- जलवायु परिवर्तन अफवाह नहीं

हंगरी की संसद ने 20 जून को संविधान में संशोधन किया, जिसमें ‘हमेशा सार्वजनिक स्थल पर निवास’ करने पर रोक लगा दी। बता दें, इससे पहले सरकार ने 2013 में एक कानून पास करके सार्वजनिक स्थल पर लगातार रहने के लिए जुर्माने का प्रावधान किया था।

जानकारों के अनुसार- यह कानून बनने के बाद अब पुलिस को सड़कों पर सोने वालों को वहां से हटाने का और उनकी झुग्गियां तोड़ने का अधिकार मिल जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार- यह कानून समाज के हितों का ध्यान रखने वाला है।

खुलासा: ब्रिटेन के शाही परिवार ने प्रिंस हैरी की शादी में दिया था अजीब फरमान- ‘सेनेटरी पैड’ पहनकर आएं मेहमान

एक मीडिया रिपोर्ट में सामाजिक मामलों की मंत्री अत्तिला फुलोप के हवाले से लिखा गया है कि इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि रात को बेघर लोग सड़कों पर ना बैठे रहें, ताकि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के उस जगह का इस्तेमाल कर सकें। एक आंकड़े के अनुसार- सरकारी आश्रयगृहों में करीब 11,000 लोगों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कम से कम 20,000 लोग सड़कों पर ही रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार- सरकार का कहना है कि वह बेघरों के लिए दिए जाने वाले अनुदान राशि में बढोत्तरी कर रही है। जबकि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और अधिकार समूहों ने भी नए कानून की आलोचना की है।