27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पेरिस जलवायु समझौते से बाहर आने के बाद बोले ट्रंप- जलवायु परिवर्तन अफवाह नहीं

ट्रंप ने कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि यह अफवाह है, लेकिन मैं हजारों अरब डॉलर नहीं देना चाहता। न ही मैं लाखों-करोड़ों नौकरियां गंवा सकता हूं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Navyavesh Navrahi

•

Updated: 15 Oct 2018, 4:10 PM IST

trump

पेरिस जलवायु समझौते से बाहर आने के बाद बोले ट्रंप- जलवायु परिवर्तन अफवाह नहीं

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने उस दावे से पलट गए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि जलवायु परिवर्तन कोरी अफवाह है। उन्होंने माना कि यह अफवाह नहीं, लेकिन यह मानवजनित और स्थाई प्रभाव भी नहीं है। एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि जलवायु परिवर्तन स्थाई नहीं है। यह फिर होगा।

ट्रंप ने इस दौरान वैज्ञानिकों पर यह आरोप भी लगाया कि उनके पास ‘बड़ा राजनीतिक एजेंडा’ है। उन्होंने कहा कि वह जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए काम करेंगे, लेकिन वे किसी भी हालत में अमरीका को नुकसान की स्थिति में नहीं देखना चाहते हैं। बता दें, अमरीका ग्रीन हाउस गैसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है।

खुलासा: ब्रिटेन के शाही परिवार ने प्रिंस हैरी की शादी में दिया था अजीब फरमान- ‘सेनेटरी पैड’ पहनकर आएं मेहमान

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वे अभी भी जलवायु परिवर्तन को अफवाह मानते हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा- ‘मुझे लगता है कि कुछ हो रहा है। कुछ बदल रहा है और उसमें दोबारा बदलाव होगा। मुझे नहीं लगता कि यह अफवाह है, मुझे लगता है कि संभवत: कुछ अंतर है। लेकिन मुझे नहीं पता है कि यह मानवजनित है।’

उन्होंने इन शब्दों पर बल दिया कि-‘मैं यह नहीं कहूंगा कि यह अफवाह है, लेकिन मैं हजारों अरब डॉलर नहीं देना चाहता। न ही मैं लाखों-करोड़ों नौकरियां गंवा सकता हूं। मैं नुकसान की स्थिति में नहीं आना चाहता।’

एक पत्रकार के लिए अमेरिका ने सऊदी अरब को दे डाली धमकी, जानें क्या है पूरी कहानी

गौर हो, ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन को अफवाह बताते हुए जून, 2017 में अमरीका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर कर लिया था। उन्होंने तब कहा था कि 190 से ज्यादा देशों के बीच हुए पेरिस समझौते में भारत और चीन जैसे देशों को अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाया गया है, जबकि इससे अमरीकी अर्थव्यवस्था और नौकरियों को खतरा पैदा हो गया।