संसद में खाना खाने के लिए ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी जेब, अब 35 की जगह 100 रुपए में मिलेगी थाली

  • Parliament canteen rate list : सचिवालय की ओर से जारी किया गया संसदीय कैंटीन मेन्यू का रेट लिस्ट
  • सर्वेक्षण के अनुसार 17 करोड़ रुपए की सब्सिडी में महज 24 लाख होते थे सांसदों पर खर्च

By: Soma Roy

Published: 01 Feb 2021, 07:23 PM IST

नई दिल्ली। दुनिया आज 21वीं सदी में पहुंच गई है। इस दौरान देश कई बदलाव के दौर से भी गुजरा है। मगर इन सबके बावजूद भारतीय संसद के कैंटीन में मिलने वाले खाने के रेट में किसी तरह की तब्दीली नहीं की गई। सांसद एवं आंगतुक आराम से सस्ती दरों पर भरपेट खाना खाते थे। लोगों के काफी विरोध के बाद आखिरकार सरकार ने इसे बदलने का फैसला किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 19 जनवरी को संसद कैंटीन में भोजन पर मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने की घोषणा की थी। जिसके बाद से यहां मिलने वाला खाना महंगा हो गया। पहले 35 रुपए में मिलने वाली शाकाहारी थाली के लिए अब 100 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। कैंटीन के जारी नए रेट लिस्ट में ये बदलाव देखे जा सकते हैं।

बताया जाता है कि पिछले 52 साल से संसदीय कैंटीन के संचालन का जिम्मा उत्तर रेलवे के पास था। अब इसे भारत पर्यटन विकास निगम यानी आईटीडीसी को सौंप दिया गया है। इसमें पांच सितारा होटल के शेफ खाना पकाएंगे। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी कैंटीन में मिलने वाले खाद्य सामग्रियों के रेट लिस्ट के अनुसार अब बुफे लंच मांसाहारी 700 रुपए में मिलेगा। जबकि शाकाहारी बुफे लंच के लिए आपको 500 रुपए चुकाने होंगे। इसके अलावा नाॅर्मल शाकाहारी थाली के लिए 100 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। पहले इसकी कीमत महज 35 रुपए थी। जिसमें सलाद 9 रुपए और चपाती 2 रुपये में थी। इसी तरह वेज बिरयानी 50 में मिलेगी। जबकि चिकन बिरयानी 100 रुपए, मटन बिरयानी 150 रुपए और चिकन करी 75 रुपए में मिलेगी।

रोजना 4,500 लोग खाते हैं खाना
एक सर्वेक्षण के अनुसार 17 करोड़ रुपये की सब्सिडी में से केवल 1.4 प्रतिशत यानि 24 लाख रुपये सांसदों पर खर्च किए जाते हैं। बाकी कम कीमत पर खाना खाने वालों में विजिटर्स, सिक्योरिटी एवं पत्रकार समेत अन्य लोग शामिल होते हैं। बताया जाता है कि एक सत्र के दौरान एक दिन में औसतन लगभग 4,500 लोग कैंटी में प्रतिदिन भोजन करते हैं। अभी कैंटीन में 48 से लेकर करीब 58 तरह के पकवान बनाए जाते हैं।

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