ग्रामीणों ने किया मनरेगा कार्य का बहिष्कार, नाराज मजदूरों ने जमकर की नारेबाजी

ग्रामीणों ने किया मनरेगा कार्य का बहिष्कार,  नाराज मजदूरों ने जमकर की नारेबाजी

Deepak Sahu | Publish: Mar, 17 2019 06:50:55 PM (IST) Gariaband, Raipur, Chhattisgarh, India

ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर जाकर शुक्रवार की सुबह जमकर नारेबाजी भी की।

देवभोग. मनरेगा में कम मजदूरी मिलने की बात कहते हुए डुमरबाहाल के ग्रामीणों ने गांव में बैठक कर मनरेगा के काम का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया। वहीं ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर जाकर शुक्रवार की सुबह जमकर नारेबाजी भी की।

ग्रामीणों के द्वारा मनरेगा कार्य स्थल पर हंगामा मिलने की खबर पाते ही जनपद सीईओ मोहनीश आनंद देवांगन भी डुमरबाहाल पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की,लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों का आरोप था कि उन्होंने सही गोदी खोदा है, लेकिन मूल्यांकन गलत तरीके से करते हुए उनकी मजदूरी राशि काट दी है।

वहीं शुक्रवार से ही ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर जाकर नारेबाजी करते हुए मनरेगा के काम का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया। ग्रामीण बताते हैं कि जहां उनके काम का उचित मजदूरी नहीं मिल रहा है, ऐसे काम को करने से क्या मतलब रह गया है। नाराज ग्रामीणों ने जिम्मेदारों के खिलाफ भी नाराजगी व्यक्त करते हुए जमकर नारेबाजी की।

दूसरे राज्य में जाकर करेंगे काम
ग्रामीण चुन्नीलाल और पुरनचंद्र का कहना है कि गांव में मनरेगा का काम तो दिया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से उनकी मजदूरी राशि में मूल्यांकन के दौरान कैंची चलाई जा रही है ऐसी स्थिति में यहां रहकर मजदूरी करके उनका परिवार चलाना संभव नहीं हो पा रहा है। क्यों कि मनरेगा के मजदूरी के भरोसे ही उनका जीवनयापन होता है। ग्रामीणों की माने तो मनरेगा के काम का बहिष्कार तो उन्होंने कर ही दिया है, ऐसी स्थिति में अब उनके पास दूसरे राज्य में जाकर काम करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। हालांकि पंचायत सचिव भुनेश्वर नागेश का कहना है कि ग्रामीणों को समझा लिया गया है, वे काम पर जाने को तैयार हो गए है।

100 रुपए के हिसाब से मिली है मजदूरी
मनरेगा का काम कर रहे रेपरंजन निधि ने बताया कि उनके गांव में शंकरलाल पिता बनमाली के निजी तालाब में मनरेगा का काम चला। इस दौरान गांव के 160 मजदूर वहां काम करने पिछले चार हफ्ते से जा रहे हैं। वहीं चुन्नीलाल, पुरनचंद्र पात्र का कहना है कि गांव के सभी लोगों को 100 रुपए के हिसाब से मजदूरी राशि दी गई है। ग्रामीण बताते हैं कि पूरे 160 मजदूरों को मात्र प्रतिदिन की राशि एक अनुमान लगाकर 100 रुपए उनके खाते में डाला गया है।

रेपरंजन बताता है कि उसने तीन हफ्ता तक काम किया है और उसके खाते में 1800 रुपए ही आए है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित मूल्यांकनकर्ता के द्वारा टेबल में बैठकर ही मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। शासन के नियमानुसार 14 बाई 14 और 8 इंच का गोदी खोदना रहता है, तब जाकर उनके खाते में 174 रूपए जमा होती है।

मैं भी फील्ड में गया था, तकनीकी सहायक के द्वारा उसका मूल्यांकन किया गया था।शासन के नियमानुसार एक मापदंड के अनुसार गोदी खोदना होता है, तब उन्हें 174 रुपए का मजदूरी भुगतान किया जाता है। वे शासन के नियमानुसार गोदी नहीं खोद रहे है, तब उनके मजदूरी राशि में कटौती की जा रही है। वहीं यदि नियमानुसार ग्रामीण गोदी खोदते है,तो उन्हें शासन के द्वारा तय की गई राशि दी जाएगी।ग्रामीणों को मनरेगा के काम का बहिष्कार करने जैसे कदम नहीं उठाने दिया जाएगा, इसके लिए मैं सतत् निरीक्षण करूंगा।
मोहनीश आनंद देवांगन, सीईओ, जनपद पंचायत देवभोग

ग्रामीणों द्वारा जितना काम मौके पर किया गया है, उसी आधार पर मैंने मूल्यांकन किया है। वहीं मौके पर जाकर निरीक्षण करने के बाद ही मूल्यांकन मेरे द्वारा किया जाता है।
कुरेन्द्र बघेल, तकनीकी सहायक,मनरेगा देवभोग

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