Teen Talaq पीड़िता बोलीं- मोदी सरकार बनाए ऐसा कानून कि फिर ना हो ऐसा जुल्म

Supreme Court Decision on Triple Talaq : मुस्लिम महिलाओं को अब बस तीन तलाक पर बनने वाले कानून का इंतजार

 

By: pallavi kumari

Updated: 22 Aug 2017, 01:57 PM IST

Ghaziabad News. सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में Teen Talaq पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम ने कोर्ट ने कहा है कि संसद इसपर 6 महीने के भीतर कानून बनाए। संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती तब तक तीन तलाक पर रोक रहेगी। अगर 6 महीने के भीतर कानून नहीं बनता है तो ये तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे भी जारी रहेगा।

प्रदेश की महलिाओं ने और Triple Talaq पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि उसने सरकार की मंशा पर सवाल भी उठाए हैं। पीड़िता ने सरकार से उम्मीद जताई है कि वह अपने तय समय में कानून बनाकर महिलाओं की मदद करेगी।

 Triple Talaq मुद्दे पर बने सख्त कानून

गाजियाबाद की रहने वाली Teen Talaq की पीड़िता का कहना है कि मैंने तो निकाह के बाद तो एक अच्छे घर का सपना देखा था लेकिन मेरे पति ने मुझे हमेशा मारापीटा है। मुझे सबके सामने बस तीन तलाक कह दिया गया। और घर से निकाल दिया गया। मैं अब बस सरकार से यही कहना चाहती हूं कि इस पर सख्त से सख्त कानून बने ताकि मेरी जैसी कई पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ मिल सके। और मेरी जैसी कई मुस्लिम महिला इसका शिकार ना हो। आपको बता दें इस महिला का पति इस के गुप्त अंगो पर सिगरेट से दागा करता था साथ ही कई अमानवीय बर्ताव करता था। इसकी शिकायत जब पीड़िता ने पुलिस से की तो पुलिस ने महिला के पति को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। लेकिन जैसे ही यह महिला जेल से आई उसने इस महिला को तलाक दे दिया उस दिन से ही महिला न्याय की आस में दर-दर की ठोकरे खा रही हैं।

 

 

वहीं आयशा का कहना है कि हम इस फैसले से खुश हैं। सरकार ने एक कदम उठाया है। इस पर कानून जल्द बनना चाहिए। 6 महीने के लिए रोक अच्छा है लेकिन इसपर जल्द कानून बन जाए तो अच्छा है।

इधर शारदा सिंह, ऑल इंडिया वुमेन क्राइम की सदस्य का कहना है कि इस पर बिल्कुल कानून बनना चाहिए। महिलाओं को तलाक देकर घर से बाहर कर दिया जाता है जो बिल्कुल गलत है। केन्द्र सरकार को चाहिए कि एक ऐसा नया लॉ बनाए जिसमें वो वैसे पतियों के खिलाफ कानून हो जो सिर्फ महिलाओं को प्रताड़ित करना जानते हैं।

वहीं कुछ महिलाएं इस फैसले से खफा भी हैं। वंदना चौधरी सोशल वर्कर ने बताया कि महिला समाज के लोग इससे निराश हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट की फैसले से खुश नहीं हैं। उन्होंने ये उम्मीद की थी कि इसपर और भी कई कड़े फैसले आएंगे।

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