Jaypee के हजारों बायर्स को जल्द मिलेगी बड़ी राहत, बिल्डर ने जमा कराए 100 करोड़

2009 में यमुना प्राधिकरण ने आवंटित की थी 1000 हेक्टेयर जमीन। 940 करोड़ जमा नहीं कराने पर रद्द हुआ था स्पोर्ट्स सिटी का आवंटन। बिल्डर और प्राधिकरण के बीच मामला हाइकोर्ट में चल रहा है।

ग्रेटर नोएडा। जेपी बिल्डर (jaypee builder) के हजारों बायर्स के लिए राहत भरी खबर है। कारण, बिल्डर द्वारा बकाया राशि में से यमुना प्राधिकरण (yamuna authority) में 100 करोड़ रुपये जमा करा दिए गए हैं। हालांकि बिल्डर पर अभी भी 840 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं बताया जा रहा है कि प्राधिकरण द्वारा बिल्डर के उन प्रोजेक्टों को बहाल करने का आदेश दिया जा सकता है जिनका काम रुकवा दिया गया था। इसका फैसला प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में होना है।

यह भी पढ़ें: श्रीलंका दौरे पर शिखर धवन के साथ भुवी को टीम इंडिया में मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

बता दें कि यमुना सिटी में जेपी असोसिएट्स की स्पोर्ट्स सिटी का आवंटन रद्द होने पर बिल्डर हाई कोर्ट पहुंचा था। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि वह पहले यमुना प्राधिकरण में सौ करोड़ रुपये जमा कराएं। इसके बाद ही आगे की सुनवाई होगी। जिसके बाद बिल्डर द्वारा दो किश्तों में प्राधिकरण में सौ करोड़ की रकम जमा करा दी गई है। जून अंत या जुलाई में होने वाली बोर्ड बैठक में बिल्डर को राहत मिलने के आसार बताए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: सोशल मीडिया पर एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे सीएम योगी और अखिलेश यादव, जानिए कैसे

गौरतलब है कि यमुना प्राधिकरण ने 2009 में जेपी एसोसिएट को 1000 हेक्टेयर जमीन आवंटित की थी। इस जमीन पर बिल्डर को 35 फीसदी क्षेत्र में स्पोर्ट्स सिटी और बाकी में कमर्शल, इंस्टिट्यूशनल, आवासीय ग्रुप हाउसिंग व प्लॉट विकसित करने थे। इस जमीन की रकम बिल्डर द्वारा जमा नहीं कराई गई। जिसपर जेपी ने कई प्रोजेक्ट लॉन्च किए और हजारों लोगों ने यहां पैसा निवेश किया। प्राधिकरण द्वारा 2011 से लेकर 2015 तक कुल 21 बार नोटिस भी जारी किए। लेकिन बिल्डर द्वारा प्राधिकण के 940 करोड़ रुपये जमा नहीं कराए गए। जिसके बाद प्राधिकरण ने कड़ा एक्शन लेते हुए स्पोर्ट्स सिटी का आवंटन रद्द कर दिया था। फिलहाल यह मामला कोर्ट में चल रहा है।

Show More
Rahul Chauhan
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned