ओडीएफ डबल प्लस के सर्वे के बाद फिर से बिगड़े हालात

शहर को ओडीएफ डबल प्लस के सर्वे के लिए आई टीम के जाने के बाद फिर से शौचालयों के वही हालात हो गए। व्यवस्थाएं बदतर हो गई हैं, जबकि टीम के आने से पहले निगम ने कई तरह के ताम झाम किए थे जिसमें शौचालयों में जहां हैंडवॉश से लेकर टॉवल तक की व्यवस्था की गई थी लेकिन सर्वे के बाद हालात फिर से पुराने ढर्रे पर ही लौट आए हैं।


शहर को ओडीएफ डबल प्लस का दर्जा दिलाने के लिए निगम ने दो बार आवेदन किया लेकिन दोनों बार ही इसे निरस्त कर दिया गया। सांसद विवेक नारायण शेजवलकर के कहने पर एक बार फिर से टीम ने सर्वे किया है। पहले बार जब टीम आई तो निगम को काफी मशक्कत करना पड़ी। शहर के शौचालयों के हालात बदतर थे इनकी मरम्कत से लेकर इन्हें संवारा गया। इस पर लगभग २० लाख रुपए भी खर्च किए गए। लेकिन जब टीम आई तो उसे कुछ खामियां मिलीं और आवेदन को निरस्त कर दिया गया।


दूसरी बार फिर की तैयारी
दूसरी बार जब सर्वे के लिए टीम आई तो निगम ने फिर से एक बार सार्वजनिक शौचलयों को संवारा और वहां पर फिर से साबुन, हैंडवॉश, तोलिया आदि व्यवस्थाएं कीं। लेकिन टीम को जलालपुर स्थित एसटीपी पर मलमूत्र मिला और यह सिद्ध हो गया कि खुले में यहां शौच हो रहा था जिसके चलते दूसरी बार भी आवेदन को निरस्त कर दिया गया। लेकिन इसको लेकर नगर निगम कमिश्नर संदीप माकिन ने केन्द्र में अधिकारयों से एक बार फिर से निरीक्षण करने का आग्रह किया। वहीं सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया तो फिर से सर्वे के लिए टीम तैयार हो गई।


तीसरी बार फिर सुधारीं व्यवस्थाएं
तीसरी बार जब टीम शहर आई तो सभी शौचालयों में एक व्यक्ति सफाई के लिए तैनात कर दिया गया। वह बाकायदा ड्रेस कोड में था और उसके हाथों में ग्लब्स थे और मुंह पर मास्क लगा हुआ था। कुछ जगहों पर तो शौचालयों को फूलों से संजाया गया था। जिसे देखकर लग ही नहीं रहा था कि यह शहर के शौचालय हैं।


अब फिर वही हाल
ओडीएफ डबल प्लस का सर्वे हुए लगभग १५ दिन से अधिक समय हो चुका है। नगर निगम फिर से पुराने ढर्रे पर ही लौट आया है। सार्वजनिक शौचालय जहां सर्वे के दौरान हैंडवॉश रखे हुए थे वहां पर अब साबुन तक नहीं है। तोलिया तो दूर की बात है शौचालय की सही ढंग से सफाई तक नहीं की जा रही है। कुछ यही हाल मूत्रालयों का भी है। यहां तो कभी सफाई ही नहीं होती जिसके कारण गंदगी से बुरा हाल है।


तो सुधर सकते हैं हालत
अगर नगर निगम द्वारा सर्वे टीम के आने से पहले तैयारी करने के बजाए पूरे साल ही इसकी मॉनिटरिंग सही ढंग से की जाए तो हालात कुछ और ही होंगे। इसके साथ ही निगम को कुछ छिपाने की भी जरूरत नहीं होगी। हर कार्य आसानी से हो सकेगा लेकिन निगम द्वारा सिर्फ टीम के आने के समय ही सार्वजनिक शौचालयों पर ध्यान दिया जाता है। जिसके कारण हालत बिगड़ जाते हैं।

Vikash Tripathi
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