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Gwalior traffic साल दर साल सड़कों पर बढ़ी गाड़ियों की संख्या, शहरी परिवहन का इंतजाम नहीं

गाड़ियों की गिनती का आंकड़ा जिले में 8 लाख को पार कर रहा है, जिस हिसाब से वाहनों की तादात बढ़ी है उनसे यातायात महकमे को परेशान कर दिया है। उसकी नजर में हालात

ग्वालियरJun 10, 2024 / 06:12 pm

रिज़वान खान

Gwalior traffic गाड़ियों की गिनती का आंकड़ा जिले में 8 लाख को पार कर रहा है, जिस हिसाब से वाहनों की तादात बढ़ी है उनसे यातायात महकमे को परेशान कर दिया है। उसकी नजर में हालात

Gwalior traffic

Gwalior traffic गाड़ियों की गिनती का आंकड़ा जिले में 8 लाख को पार कर रहा है, जिस हिसाब से वाहनों की तादात बढ़ी है उनसे यातायात महकमे को परेशान कर दिया है। उसकी नजर में हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में सड़कों पर चलने लायक जगह मिलना मुश्किल होगी। क्योंकि शहर के ज्यादातर रास्ते चौड़े हो चुके हैं अब इनमें ज्यादा तोड़फोड़ की गुजाइंश नहीं है। हालात काबू रखना है तो परिवहन के साधन को लेकर ठोस प्लाङ्क्षनग जरूरी है।
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जिले में फिलहाल सवारी और लोङ्क्षडग वाहन की गिनती एक लाख के करीब है। फिर भी मुसाफिर और रूट के हिसाब से गाड़ियों की गिनती कम है। ट्रैफिक एक्सपर्ट की नजर में महाराज बाड़ा , जनकगंज, ङ्क्षशदे की छावनी रॉक्सी रोड, माधौगंज, आमखो, नया बाजार, गश्त का ताजिया, दौलतगंज, लोहिया बाजार, दालबाजार, थीम रोड, फूलबाग, किलागेट का रास्ता, हजीरा, लोको रोड, सदर बाजार, बारादरी से सात नंबर चौराहा समेत करीब १९ रास्तों पर यातायात का दबाव ज्यादा है। इनमें ज्यादातर रास्तों पर निजी वाहनों के अलावा बड़ी तादात में सवारी वाहनों की भीड़ है। कुछ समय पहले इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने सड़कों पर यातायात के प्रेशर को नापा था उसमें भी पाया गया था सवारी वाहनों का लगातार बढ़ रहा दबाव यातायात का मिजाज बिगाड़ रहा है। रास्तों से जाम हटाना है तो सलीके का परिवहन जरूरी है।
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यह प्रयोग होना चाहिए

  • परिवहन में छोटे वाहनों का इस्तेमाल सड़कों पर वाहनों की गिनती बढ़ा रहा है। उसकी जगह बस, मिनी बस का संचालन होना चाहिए।
  • मेन बाजार में से शहर की आउटर कॉलोनियों तक रास्तों के हिसाब से परिवहन के साधन का संचालन
  • जरूरत के हिसाब से मेन बाजार नो व्हीकल जोन बनाए जाएं। सख्ती से पालन कराया जाए।

प्रयोग हुए नाकाम

  • दो दशक पहले शहर में निजी सिटी बस का संचालन किया गया। लेकिन वाहनों की भीड़ बढ़ने की वजह से सवारी बसों को जाम की वजह मान कर सड़कों से हटाया गया।
  • कुछ साल पहले फिर सिटी बस का प्रयोग किया गया। लेकिन रास्तों के हिसाब से बस की लंबाई चौड़ाई ज्यादा मानी गई और प्रयोग नाकाम रहा।

एक्सपर्ट व्यू

शहर की सड़कों को चौड़ा किया जा चुका है। कुछ रास्तों की बात छोड़ें ज्यादातर रास्तों पर बस और मिनी बस का परिवहन में इस्तेमाल किया जा सकता है। जिन रास्तों पर परिवहन के बड़े साधन संचालित किए गए उन पर टेंपो और दूसरे सवारी वाहनों को परमिट नहीं दिया जाए। इस प्रयोग से रास्तों पर परिवहन के साधन सीमित होंगे। क्योंकि आने वाले वक्त की जरूरत भी यही है। समय रहते योजनात्मक तरीके से इस बारे में नहीं सोचा गया तो आने वाले समय में रास्ते पर चलने के लिए संघर्ष की स्थिति होगी।
शैलेन्द्र पांडेय, रिटायर्ड एसपी

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