मैरिज गार्डन संचालकों को राहत, इस सीजन में हो सकेंगी शादियां

-२० जनवरी तक शपथ पत्र पर देनी होगी मैरिज बुकिंग की जानकारी, इसके बाद नहीं मिलेगी राहत

ग्वालियर। शादियों के लिए गार्डन बुक कराने वालों तथा मैरिज गार्डन संचालकों को उच्च न्यायालय से फिलहाल राहत मिल गई है। उच्च न्यायालय ने २० जनवरी तक सभी मैरिज गार्डन संचालकों से उनके द्वारा शादी के लिए की गई बुकिंग की सूची शपथ पत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। एेसा न कर पाने पर उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकेगी। न्यायालय ने अगले सीजन के लिए बुकिंग नहीं करने के निर्देश भी दिए हैं।

अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी द्वारा प्रस्तुत पालन प्रतिवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय के आदेश के कारण वर्ष २०१२ के जो मैरिज गार्डन संचालित हो रहे हैं उनमें शादियों की जो बुकिंग हैं वे हो सकेंगी। मोदी की ओर से न्यायालय में जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि जिन मैरिज गार्डनों को सील किया गया हैं उन गार्डनों में जिन परिवारों की शादियां होने वाली हैं उनकी ओर से शासन के पास प्रार्थना पत्र आए, जिसमें कहा गया कि अगर मैरिज गार्डनों के ताले नहीं खोले गए तो उनके सामने बड़ा सामाजिक संकट उत्पन्न हो सकता हैं। शादी के लिए उनके द्वारा पूरी तैयारी की जा चुकी है। अब वे कहां शादी करेंगे। इस पर न्यायालय में शासन की ओर से आवेदन देकर कहा गया कि जिनकी बुकिंग हो चुकी हैं उनके विवाह संपन्न हो इसके लिए इसके लिए बुकिंग वाले दिनों में मैरिज गार्डन खोले जाने की अनुमति दी जाए। न्यायालय ने यह राहत देते हुए उन्हें इस सीजन में बुक की गई शादियों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सन् २०१२ से पहले मैरिज गार्डन को पहले मिली थी राहत

शासन द्वारा नियम विरुद्ध संचालित शहर के ५० से अधिक मैरिज गार्डन सील कर दिए गए थे। शासन के इस आदेश के खिलाफ मैरिज गार्डन संचालकों ने उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। इसमें उन्होंने भूमि विकास नियम २०१२ के नियमों को लेकर राहत दिए जाने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने इस पर नियम २०१२ के नियमों के तहत इस नियम के लागू होने से पहले संचालित मैरिज गार्डनों के ताले खोले जाने के आदेश दिए थे। लेकिन इसके बाद बनें मैरिज गार्डनों पर लगे तालों को खोलने से इंकार कर दिया था। न्यायालय ने शासन के इस संंबंध में दिए गए प्रतिवेदन पर विचार के बाद २०१२ के बाद के मैरिज गार्डनों में भी शादियों के आयोजन की अनुमति दे दी है।
आदेश सुरक्षित

मैरिज गार्डन संचालकों की यूनियन द्वारा न्यायालय में भूमि विकास नियम २०१२ के नियमों को ही चुनौती देते हुए एक और याचिका प्रस्तुत की गई है। याचिका में कहा गया कि इस नियम के कारण गरीब लोग मैरिज हाउस में विवाह ही नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इन नियमों में मैरिज गार्डन के लिए एक हैक्टेयर जमीन होना चाहिए वह जमीन वर्तमान कुछ ही मैरिज गार्डनों के पास एेसे में ये सारे मैरिज गार्डन बंद हो जाएंगे और इससे काफी परेशानी उत्पन्न होगी। संचालकों की ओर से कई न्यायिक दृष्टांत भी प्रस्तुत किए गए। वहीं यह भी बताया गया कि कैप्टन रुपसिंह स्टेडियम के निर्माण के साथ उसकी पार्र्किंग की भी व्यवस्था नहीं है। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले को आदेश के लिए सुरक्षित कर लिया है।

Rajendra Talegaonkar Desk/Reporting
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