सटटा कारोबार का चैलेंज, व्हाटसएप, फेसबुक मैसेंजर के जरिए दांव की बुकिंग

हाइटेक तरीके से गलियों से लेकर पॉश कॉलोनी तक जमाया कारोबार

By: Puneet Shriwastav

Updated: 28 Jan 2021, 01:44 AM IST

ग्वालियर। सटटा कारेाबार पुलिस के लिए बडी चुनौती बना है। कंपू में लेडी सटटा सरगना गुल्लो बाथम ने पुलिस पर जिस तरह घेरकर हमला किया उसने सटटा कारोबारियों के दुसाहस को जाहिर कर दिया है।

पुलिस के रेकार्ड में शहर में ५० से ज्यादा ठिकानों पर ऑनलाइन सटटा कारोबार संचालित हो रहा है। लेकिन धंधे को करने वालों पर नकेल नहीं कसी गई है।

इस कारोबार को बस्र्ट करने के लिए जुटे पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मानते हैं कि सटटा कारोबार करने वाले पुलिस के सारे पैंंतरे समझते हैं, इसलिए कारोबार के ठिकाने और तरीके हर दिन बदलते हैं।

इनका सारा कारोबार एक कमरे के अंदर से कंम्पयूटर और मोबाइल के जरिए संचालित होता है। इसलिए उसे रंगे हाथ पकडना आसान नहीं होता। रूटीन ग्राहकों को भी यह सटटेबाज नए पैंतरे से अपडेट रखते हैं। ग्राहकों का तबका भी सटोरियों के बचाव में रहता है इसलिए पुलिस के मूवमेंट से लेकर निगरानी का तक की खबरें सटटा कारोबारियों तक पहुंचती हैं।
सटटा कारोबार को बस्र्ट करने का टॉस्क शहर और देहात पुलिस को थमाया गया है। क्योंकि शहर के साथ अब देहात भी इस लत से दूर नहीं है। खासकर आनलाइन सटटा कारोबारियों ने दांव लगाने के ठिकाने गांवों तक जमाए हैं।

पुलिस अधिकारी कहते हैं कि शहर के बडे सेंटर को साफ कर दिया जाएगा तो छोटे अडडे तो खुद व खुद खत्म होंगे। इस कारोबार में जुटे लोगों और उनके ठिकानों को खत्म करने के लिए थाना स्तर पर टास्क दिया गया है। पुलिस इन्हें लगातार चिंहित करने में जुटी है।
इस तरह बच रहे सटटा कारोबारी
सटटा कारोबार पर पुलिस एक्शन में है भनक इस धंधे से जुडे लोगों को भी है। इसलिए पुराने ढर्रे पर सटटा लगवाने वालों ने तो ठिकानों और वहां बुकरी काटने वालों को बदल दिया गया है।

नए ठिकानों पर सटटा कारोबारियों के नए गुर्गे काम संभाल रहे हैं। सटोरियों के नए गुर्गुों के बारे में इनपुट नहीं है। जब तक उनकी भनक लगती है तो ठिकाना और सटटा लगाने वाले फिर बदल दिए जाते हैं।

जबकि ऑनलाइन कारोबार संचालित करने वाले कारोबार होटल, पॉश कॉलोनियों के फलैट और आलाशीन घरों से संचालित करते हैं। इसलिए उनकी पहचान आसान नहीं होती।
होम डिलेवरी पर कारोबार
पुलिस सटटे के ठिकानों और वहां लेनदेन करने वालों को रंगे हाथ पकडने के लिए दविश देगी, लेकिन ग्राहकों की सूची नहीं बता सकती। इसलिए कुछ बडे सटटा कारोबारियों ने रूटीन और बडे दांव लगाने वालों के पास एजेंट भेजकर घर बैठे ही लेनदेन और बुकिंग मुहैया कराई है।
इन ठिकानों पर आनलाइन सटटा कारोबार
मुरार-- धर्मेन्द्र, अरूण , उमेश, मुकेश गुप्ता, राजू गुप्ता, मुकेश जैन, महेश, और मास्टर
हजीरा - सोनू , अजय माइकल, नीरज, अमजद और किटटू
कोतवाली- सेंटो, शैलू, हरिराम , अंशुल, तमन्ने गुप्ता, कपूर, मनोज राठौर, भोलू, संतोष, शाही बंसल और विक्की।
पडाव- आशीष, संजय जैन, अमन जैन, पकंज, महावीर, राकेश , गोलू, दिलीप, प्रदीप यादव
जनकगंज- फिरोज, संजू, और कल्लू
पुलिस का कहना है कि इनमें ज्यादा सटटा कारोबारी दिल्ली से ऑन लाइन सटटे की लिंक लेकर कारोबार संचालित कर रहे हैं। इनके कारोबार के बारे में पुलिस को जानकारी भी है।

लेकिन सटटा कारोबारी सुरक्षित ठिकाने लगातार बदलते हैं। इसलिए रंगे हाथ शिकंजे में नहीं आते। इनमें ज्यादा सटटा कारोबारी 30 से 40 प्रतिशत कमीशन पर कारोबार संचालित कर रहे हैं। सटटा लगवाने से लेकर दांव लगाने वालों से रकम की वसूली कर मेन सेंटर पर पहुंचाना भी इनकी जिम्मेदारी है।
इनका कहना है
सटटे के पुराने ढर्रे से ज्यादा आनलाइन सटटा लगवाने का कारोबार संचाालित होता है। इस कारोबार को करने वाले भी हाईटेक और ज्यादातर सफेद पोश होते हैं।

इसलिए उनकी जानकारी काफी समय बाद सामने आती है। हरिशंकरपुरम, खेडपति कॉलोनी, आनंदनगर सहित कॉलोनियों में ऑन लाइन सटटे का कारेाबार पकडा भी गया है।

लेकिन इसके बावजूद इनपुट है यह कारोबार कई जगहों पर संचालित हो रहा है। इसमें दावं लगाने वाले भी सफेद पोश ज्यादा होते हैं।

इसलिए पुलिस को उन्हें आईडेंटीफाई करने में भी समय लगता है। हालांकि इस कारोबार को बस्र्ट करने के भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सत्येन्द्र तोमर एएसपी क्राइम

Puneet Shriwastav Reporting
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