जनता की नब्ज और सत्ता के साथ की हवा भांप लेने में माहिर हैं नरेश अग्रवाल, मौका देखकर बदलते रहे हैं दल

अखिलेश यादव से नाराज नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल, यह है नरेश अग्रवाल का पूरा राजनीतिक सफर...

By: Hariom Dwivedi

Updated: 13 Mar 2018, 12:08 PM IST

हरदोई. सोमवार को नरेश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी से किनारा करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में नरेश अग्रवाल ने पार्टी की सदस्यता ले ली। समाजवादी पार्टी की ओर से खुद को राज्यसभा नहीं भेजे जाने से नाराज थे। गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने नरेश अग्रवाल की बजाय जया बच्चन को समाजवादी पार्टी से राज्यसभा भेजने का फैसला किया था। नरेश अग्रवाल ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अब हम आजीवन भाजपा की सेवा करता रहूंगा। उन्होंने खुद की जगह जयाप्रदा को राज्यसभा भेजे जाने से नाराजगी जताई। कहा कि अखिलेश यादव ने एक नाचने वाली की तुलना मुझसे की।

ऐसा पहली बार नहीं है जब नरेश अग्रवाल दूसरे दल में शामिल हुए हैं। तकरीबन चार दशक के लंबे राजनीतिक करियर में उनकी छवि एक दलबदलू नेता की रही है। नरेश अग्रवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की कांग्रेस पार्टी संग की थी। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर ही वह पहली बार विधायक चुने गये। इस दौरान नरेश अग्रवाल 1989 से 2008 तक लगातार यूपी विधानसभा के सदस्य रहे।

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तब चमका था नरेश अग्रवाल का सितारा
1980 से कांग्रेस से लगातार विधायक रहे बीएससी, एलएलबी नरेश अग्रवाल का सितारा तब चमका था जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ कर लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी (1997-98) बनाई और लोकतंत्र कांग्रेस पार्टी के समर्थन से प्रदेश में भाजपा की कल्याण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनवाई और सरकार में भागीदारी की थी। यहां से बुलंदियों की ओर बढ़ा उनका सितारा लगातार बढ़ता रहा और 20 साल तक वो सत्ता के साथ रहे। इस बीच उन्होंने एक बार सपा को छोड़ा और बसपा का दामन थामा, लेकिन फिर उन्होंने सपा में घर वापसी कर ली थी, लेकिन एक बार फिर राज्यसभा नहीं भेजे जाने से नाराज नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गये।

जनता की नब्ज और सत्ता की हवा भाप लेने में माहिर हैं नरेश
नरेश अग्रवाल एक बार फिर अपने दिल और दल को बदलने जा रहे हैं। कहा जाता है कि राजनीति में जनता की नब्ज और सत्ता के साथ की हवा भांप लेने वाले नरेश अग्रवाल का पूरा सियासी करियर दलदल के सहारे बुलंदियों तक पहुंचा है। यह अलग बात है कि हरदोई की राजनीति 40 वर्षों में उन्होंने प्रदेश में बतौर कैबिनेट मंत्री सत्ता की सत्ता की राजनीति भाजपा के साथ शुरू की थी और आज कमोबेश 20 साल बाद फिर से भाजपा में आ रहे हैं।

तब भाजपा में शामिल की खबरों का किया था खंडन
यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान कयास तेज थे कि नरेश अग्रवाल भाजपा में शामिल हो जाएंगे, लेकिन राज्यसभा में सपा का दीप प्रज्वलित कर रहे नरेश अग्रवाल ने भाजपा में जाने की खबरों का हमेशा खंडन किया और मोदी-योगी की लहर में भी हरदोई में सपा का झंडा बुलंद करते रहे। मोदी की आंधी के बावजूद हरदोई में साइकिल ही दौड़ी।

हरदोई से 7 बार विधायक रहे
हरदोई में नरेश अग्रवाल की लोकप्रियता का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह किसी भी दलदल में रहे, लेकिन समर्थक नरेश दल के कहे जाते रहे। यही कारण रहा के नरेश अग्रवाल राम लहर मोदी लहर योगी लहर में भी विपक्ष में रहकर चुनाव जीतते रहे। उनकी योग्यता की प्रशंसा भाजपा में भी लोग समय-समय पर करते रहे। नरेश अग्रवाल कहते रहे हैं कि उन्हें दल बदलने से कोई परहेज नहीं है, लेकिन राजनीति में कभी दिल नहीं बदलना चाहिए। यही कारण है कि वो एक बार फिर भाजपा में वापसी करने में सफल रहे हैं। नरेश अग्रवाल सात बार हरदोई से विधायक चुने गये।

राजनीतिक करियर
1980 में पहली विधायक (कांग्रेस) चुने गये
1989 से 2008 तक यूपी विधानसभा सदस्य
1997 में लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी का गठन किया
1997 से 2001 तक वो यूपी सरकार में ऊर्जा मंत्री
2003 से 2004 तक यूपी सरकार में पर्यटन मंत्री रहे
2004 से 2007 तक उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री बने
2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सांसद बने

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