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गर्भवती महिलाएं सावधान! हवा का प्रदूषण बढ़ा सकता है नवजातों की सांस की तकलीफ

न्यूयॉर्क: हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि गर्भवती महिलाओं के प्रदूषण के संपर्क में आने से उनके नवजात शिशुओं को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है। इस शोध में सबसे खतरनाक कणों की पहचान PM 2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) के रूप में हुई है, जो जंगल की आग, सिगरेट के धुएँ और गाड़ियों के धुएँ में पाए जाते हैं।

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Air pollution can increase respiratory problems in newborns

न्यूयॉर्क: एक नई रिसर्च में चिंताजनक बात सामने आई है! साफ हवा की कमी अब सिर्फ बड़ों के लिए ही नहीं, नवजात शिशुओं के लिए भी खतरनाक साबित हो रही है। रिसर्च में पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान हवा में मौजूद धूल-धुएं के छोटे कण (पीएम 2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) बच्चों में सांस की गंभीर तकलीफ का खतरा बढ़ा सकते हैं।

ये छोटे कण जंगल की आग, सिगरेट के धुएं और वाहनों के निकास से हवा में मिलते हैं। रिसर्च में शामिल शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन माताओं को गर्भावस्था के दौरान ज्यादा प्रदूषण का सामना करना पड़ा, उनके बच्चों में सांस लेने में तकलीफ, सांस फूलने जैसी गंभीर समस्याएं ज्यादा देखी गईं। ऐसे बच्चों को ठीक होने के लिए कई बार सांस लेने की मशीन और एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।

चिंताजनक बात यह है कि प्रदूषण का खतरा गर्भावस्था के किसी भी समय बढ़ सकता है, चाहे गर्भधारण से पहले हो या बाद में। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन माताओं ने एनओ2 के ज्यादा संपर्क में रहीं, उनके बच्चों को एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत ज्यादा पड़ी।

इस रिसर्च के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. चिंतन गांधी ने बताया, "हम जानते थे कि गर्भवती महिलाओं के प्रदूषण के संपर्क में आने से उनके बच्चों को भविष्य में सांस की बीमारियां, जैसे अस्थमा होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन हमें यह नहीं पता था कि प्रदूषण का इतना गंभीर असर नवजात शिशुओं पर भी पड़ सकता है।"

शोधकर्ताओं ने ये आंकड़े 10 कनाडाई शहरों की 2,001 गर्भवती महिलाओं पर किए अध्ययन के आधार पर जुटाए हैं। उन्होंने सैटेलाइट और ग्राउंड-लेवल मॉनिटरिंग उपकरणों की मदद से प्रदूषण के स्तर का अनुमान लगाया।

डॉ. गांधी ने कहा, "हवा में प्रदूषण का कोई सुरक्षित स्तर नहीं होता। हमने पाया कि जितना ज्यादा प्रदूषण होता है, उतना ही ज्यादा खतरा होता है कि नवजात शिशुओं को सांस की गंभीर तकलीफ हो सकती है।"

हालांकि शोधकर्ताओं ने यह पता नहीं लगाया है कि प्रदूषण का असर मां से बच्चे तक कैसे पहुंचता है, लेकिन पिछले रिसर्च यह बताते हैं कि प्रदूषण के संपर्क में आने वाली महिलाओं के खून में सूजन के लक्षण ज्यादा होते हैं।

डॉ. गांधी ने कहा, "इस रिसर्च के नतीजे बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे बताते हैं कि हवा को साफ रखने से नवजात शिशुओं में सांस की गंभीर तकलीफ के मामलों को कम किया जा सकता है। इसलिए, नीति निर्माताओं को इस समस्या को गंभीरता से लेने और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।"

इस रिसर्च से यह स्पष्ट होता है कि साफ हवा हर किसी के लिए जरूरी है, खासकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए। सभी को मिलकर हवा को साफ रखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी स्वस्थ सांस ले सके।