बायोकैम फॉर्मूला से बनी दवाएं कई रोगों में देती राहत

विभिन्न रोगों के लिए वैसे तो कई पैथी में कई प्रकार की दवाएं मौजूद हैं लेकिन होम्योपैथी में रोग को प्रभावी तरीके से ठीक करने के लिए बायोकैम फॉर्मूला से बनी दवाएं मौजूद हैं। खास बात है कि ये आसान तरीके से आराम देती हैं।

Divya Sharma

November, 1601:11 PM

बायोकैमिकल फॉर्मूला से बनी दवाएं शरीर में मूल तत्वों की कमी को पूरा करती हैं। ये दवाएं शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करके पहले से उपस्थित तत्वों को सही तरीके से उपयोग में लेती हैं। जानते हैं कि किन बीमारियों में इस फॉर्मूला से बनी दवाएं इस्तेमाल होती हैं-

हड्डियों के लिए : दांत निकलते समय बच्चों में चिड़चिड़ापन, कैल्शियम की कमी और फ्रेक्चर में हड्डियों को जोडऩे के लिए बायोकैमिकल फॉर्मूला से बनी कैलकेरिया फोस दी जाती है। इसमें कैल्शियम फॉस्फेट होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है।
कैसे लें : दिन में तीन बार बच्चों और बड़ों को दी जाती है। ज्यादा चिड़चिड़ेपन में बच्चों को 5-5 मिनट में 5-6 डोज देते हैं।
खून की कमी : स्वभाव में चिड़चिड़ापन, सूजन, लंबे समय से चलने वाला बुखार और बच्चों में मिट्टी खाने की आदत को दूर करने के लिए इस फॉर्मूला से बनी फैरम फोस उपयोगी है।
कैसे लें : 4 गोली बड़ों को और 2-2 गोली बच्चों को दिन में तीन बार दी जाती है। तुरंत बुखार दूर करने के लिए गोली गुनगुने पानी में घोलकर लेते हैं।
पेट व लिवर के लिए : एसिडिटी के वजह से पेट में दर्द, जलन, खट्टी डकार, पीलिया, दूध पीने के बाद छोटे बच्चों का उल्टी करना और लिवर संबंधी परेशानियों में इस फॉर्मूला से बनी नैट्रम फोस दवा मददगार है।
कैसे लें : 4 गोली बड़ों को और 2 गोली बच्चों को दिन में तीन बार देते हैं। पेट में अत्यधिक एसिडिटी महसूस होने पर 2-2 गोली 5-5 मिनट के अंतराल में 3-4 बार ले सकते हैं।
बेहतर रक्तसंचार : नसों का फूलना व नीला पडऩा, बच्चों में देरी से दांत निकलना, महिलाओं में डिलीवरी के बाद ज्यादा रक्तस्त्राव होना और शरीर में किसी भी तरह की गांठ को खत्म करने के लिए इस फॉर्मूला से बनी कैलकेरिया फ्लोर दवा देते हैं।
कैसे लें : 4 गोली बड़ों को और दो गोली दिन में 3 बार देते हैं। सरल प्रसव के लिए भी सातवें माह से यह दवा शुरू कर देते हैं।
नोट : किसी भी समस्या के लिए होम्योपैथी में प्रयोग होने वाली कोई भी दवा डॉक्टरी परामर्श के बाद ही लें क्योंकि ये दवाएं रोग और उसके लक्षणों को आधार मानकर दी जाती हैं।
एक्सपर्ट : नमिता राजवंशी, होम्योपैथी विशेषज्ञ

Divya Sharma
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