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कोविड के बाद नींद उड़ गई? मिल सकता है रामबाण इलाज!

अमेरिका के एरिजोना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता लंबे समय तक कोविड के असर से जूझ रहे लोगों की नींद की समस्या को दूर करने के लिए एक खास शोध कर रहे हैं। कई शोधों से पता चला है कि कोविड के बाद कई लोगों को नींद नहीं आती या उनकी नींद पूरी नहीं होती। इसकी वजह चिंता और घबराहट मानी जा रही है।
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जयपुर

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Manoj Vashisth

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Updated: 27 Jan 2024, 5:09 PM IST

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Can't Sleep After Covid? Study Aims to Find a Cure

अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का एक दल कोविड के बाद होने वाली लंबी बीमारी (लॉन्ग-कोविड) से जूझ रहे लोगों की नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए एक राष्ट्रीय अध्ययन का मॉडल तैयार कर रहा है।

कई अध्ययनों और मामलों से पता चला है कि लॉन्ग-कोविड से ग्रस्त लोग चिंता के कारण अनिद्रा और नींद न आने की समस्या का सामना करते हैं।

यूए हेल्थ साइंसेज के सेंटर फॉर स्लीप एंड सर्कैडियन साइंसेज के निदेशक डॉ सैयद परथासारथी इस अध्ययन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने उस अत्याधुनिक प्रयोगशाला और क्लिनिक का दौरा किया, जहां यह शोध शुरू होगा।

इस अध्ययन का मुख्य लक्ष्य लॉन्ग-कोविड से ग्रस्त लोगों को अच्छी नींद के लिए उपाय सुझाना है।

डॉ परथासारथी ने KGUN9 को बताया, "हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि हम लॉन्ग-कोविड से पीड़ित लोगों में होने वाली अनिद्रा या अत्यधिक दिन में नींद आने की समस्या को कैसे सुधार सकते हैं।" वे उन्हें वापस सामान्य जिंदगी में लाने के लिए सबसे अच्छे तरीके खोजना चाहते हैं।

डॉ परथासारथी ने उन डॉक्टरों के समर्पण की सराहना की जो प्रतिभागियों को बेहतर नींद के लिए कारगर उपाय सुझाएंगे।

यह अध्ययन मुख्य रूप से लॉन्ग-कोविड से ग्रस्त लोगों में होने वाली अनिद्रा और अत्यधिक दिन में नींद आने की समस्या पर केंद्रित है।

डॉ परथासारथी ने इस टीम की इस चुनौती से पार पाने में लोगों की मदद करने और उनकी भलाई बहाल करने के लिए सर्वोत्तम तरीके खोजने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

उन्होंने अपने शोध के सहयोगात्मक स्वरूप के बारे में बात करते हुए राष्ट्रीय क्लीनिकों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के RECOVER क्लिनिकल परीक्षणों में किए गए पिछले योगदानों का उल्लेख किया।

RECOVER कार्यक्रम ऊर्जा और मानसिक तीक्ष्णता को बढ़ाने पर केंद्रित था, लेकिन टक्सन स्थित यह टीम यह पता लगाने के लिए अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर रही है कि वायरस के अंश नींद संबंधी परेशानियों को कैसे बढ़ाते हैं।

डॉ परथासारथी के अनुसार, लॉन्ग-कोविड से ग्रस्त लोगों में नींद से जुड़ी समस्याओं का पता नहीं चल पाता, जिससे कई लोग चुपचाप परेशान रहते हैं।

टीम को धन प्राप्त हो चुका है और वे फरवरी से अध्ययन शुरू करने के लिए सक्रिय रूप से अध्ययन प्रोटोकॉल तैयार कर रहे हैं।

शोधकर्ता उन लोगों को अध्ययन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो अत्यधिक थकान, कम मानसिक ध्यान और नींद संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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