30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Heart Health: बढ़ते वजन को न करें इग्नोर, हार्ट अटैक का है बड़ा कारण

बढ़ती उम्र के साथ हार्ट को फिट रखने के लिए नियंत्रित वजन, सामान्य कोलेस्ट्रॉल व रक्तचाप का होना जरूरी है। संतुलित भोजन के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और खुश रहें। कुछ और बातों का ध्यान रहकर स्वस्थ रहा जा सकता है।

less than 1 minute read
Google source verification
5 reasons for prick in heart- Signs and preventive measures.Jpg

Heart 5 reasons for prick in heart- Signs and preventive measuresHealth: बढ़ते वजन को न करें इग्नोर, हार्ट अटैक का है बड़ा कारण

ज्यादा वजन (Obesity) : शरीर में तय मात्रा से ज्यादा फैट की वजह से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जो हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बनता है। ट्रांस फैट हार्ट अटैक का कारण बनता है। कोलेस्ट्रॉल की जांच साल में एक बार करा सकते हैं।
हाई बीपी (High Blood Pressure) : लंबे समय से हाई बीपी धमनियों को ब्लॉक करता है। जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है। डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर का लगातार उतार-चढ़ाव हार्ट के लिए ठीक नहीं होता है। इससे हृदय की कार्य क्षमता प्रभावित होती है।
हार्ट के लिए स्मोकिंग, शराब खतरनाक

स्मोकिंग से हार्ट की धमनियां सिकुड़ जाती हैं। रक्त संचार बाधित होता है। शराब हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करती है। हार्ट की पंपिंग क्षमता घटती है।
बढ़ता स्ट्रेस : तनाव का संबंध हृदय से होता है। इससे जितना हो सके दूर रहें क्योंकि तनाव से अड्रेनलिन हॉर्मोन रिलीज होता है। इससे हार्ट रेट बढ़ता है। ब्लड प्रेशर भी बढऩे लगता है। ऐसी स्थिति लगातार होने से ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, हार्ट पंपिंग से खून व उसे पहुंचने वाली ऑक्सिजन की मात्रा घटती-बढ़ती है। इससे धमनियों पर दबाव से हृदय संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
कम नींद : कम नींद से तनाव, थकान बढ़ती है। कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। कम सोने से हृदय की धमनियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। इससे पूरे दिन शरीर का संतुलन बिगड़ा रहता है। अनिद्रा की वजह से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
फैमिली हिस्ट्री : बैड कोलेस्ट्रॉल बढऩा जेनेटिक हो सकता है। माता-पिता में से किसी को ५५ साल से पहले हार्ट अटैक हुआ है तो बच्चों में आशंका कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों में जींस व खानपान की आदतों का समान होना है। बच्चों को चिकित्सक की परामर्श से जांच करानी चाहिए।

एक्सपर्ट : नूपुर जैन, सीनियर डाइटीशियन, एम्स, रायपुर

Story Loader