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मैटर्नल मार्कर टेस्ट: अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के लिए जरूरी

अधिक उम्र (32 वर्ष के बाद) में मां बनने वाली महिलाओं के शिशुओं में डाउन सिंड्रोम जैसी मानसिक व शारीरिक बीमारियों की आशंका अधिक होती है।

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मैटर्नल मार्कर टेस्ट: अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के लिए जरूरी

मैटर्नल मार्कर टेस्ट: अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के लिए जरूरी

मैटर्नल मार्कर टेस्ट अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के लिए जरूरी है। अधिक उम्र (32 वर्ष के बाद) में मां बनने वाली महिलाओं के शिशुओं में डाउन सिंड्रोम जैसी मानसिक व शारीरिक बीमारियों की आशंका अधिक होती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से मैटर्नल मार्कर टेस्ट करवाना चाहिए। इससे पता चल जाता है कि भ्रूण को कोई जेनेटिक बीमारी तो नहीं है। यह जांच उन्हें भी करवानी चाहिए जिन्हें खुद या पति को डाउन सिंड्रोम जैसी कोई दूसरी बीमारी है। जिस महिला का 5-6 बार से अधिक गर्भपात हो चुका है, उसे भी यह जांच करानी चाहिए। जिनके परिवार में किसी को मेंटल डिजीज या लो आइक्यू की समस्या है। उन्हें भी गर्भधारण के दौरान डॉक्टर की सलाह से यह जांच करवानी चाहिए। इसमें डुअल, ट्रिपल और क्वाड्रपल मार्कर, तीन जांचें होती हैं। इसमें से एक जांच कराने की जरूरत रहती है। -डॉ. मेघा. एस. शास्त्री, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ