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दिन के समय आती है झपकी, तो संभल जाएं

कम नींद, दिन के समय झपकी, शिफ्ट में काम और यहां तक कि लंबी नींद की अवधि को रिसर्चर्स ने हाई बीपी और हृदय रोग के जोखिम से जोड़ा है। उनका मानना है शिफ्ट में काम करने की स्थिति में कई बार नींद की गुणवत्ता में कमी होती है।

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जयपुर

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Jaya Sharma

Nov 15, 2023

नींद की सेहत से समझौता या रात की पारी में काम करना पुरुषों और महिलाओं और सभी आयु समूहों में उच्च रक्तचाप का खतरा पैदा कर देता है

दिन के समय आती है झपकी, तो संभल जाएं

मेलबर्न में एक हार्ट एंड डायबिटीज इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर्स के मुताबिक नींद की सेहत से समझौता या रात की पारी में काम करना पुरुषों और महिलाओं और सभी आयु समूहों में उच्च रक्तचाप का खतरा पैदा कर देता है। अध्ययन से पता चला है कि रात की पारी में काम करने वाले स्थायी कर्मचारी, जो पांच या छह घंटे से कम सोते थे, उन्हें सबसे अधिक खतरा था, लेकिन मिश्रित पारी में काम करने वालों का रक्तचाप भी बढ़ा हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि बहुत लंबे समय तक सोने से भी दुष्प्रभाव सामने आते हैं।

ऐसे बना रहेगा हेल्दी बीपी
हेल्दी बीपी को बनाए रखने के लिए सात घंटे की नींद जरूरी है, इससे ज्यादा या फिर कम नींद भी सेहत पर नैगेटिव असर डालती है। वहीं जिन लोगों की रात की शिफ्ट स्थाई है, उनमें उच्च स्तर पर ब्लडप्रेशर देखने को मिल रहा है। शरीर की सर्कैडियन घड़ी मानव शरीर में लगभग सभी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है, जिसमें पाचन क्रिया, हृदय गति और नींद से जागने का व्यवहार शामिल है। शरीर की सामान्य जैविक लय में व्यवधान शरीर को सिंक से बाहर कर सकता है, जिससे सर्कैडियन तनाव पैदा हो सकता है, और इस प्रकार नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

प्रॉपर नींद लें
विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ शरीर के लिए प्रॉपर नींद जरूरी है। यदि आप शिफ्ट में काम करते हैं, तो नींद का पूरा ध्यान रखें। अपनी दिनचर्या को इस तरह से प्लान करें कि सात घंटे नींद के लिए निकाल सकें। शिफ्ट बदलने से भी परेशानी बढ़ती है, इसके लिए भी खुद को तैयार रखें। हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज पर फोकस रखें।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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