
Talking to Yourself: When It Could Signal a Bigger Concern
Talking to Yourself : कभी-कभी हम अपनी ज़िंदगी में ऐसे लोगों को देख लेते हैं, जो खुद से ही बातें करते (Talking to Yourself) नजर आते हैं। यह दृश्य हमें अजीब लग सकता है और मन में कई सवाल उठ सकते हैं: क्या ये लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं? क्या उन्हें इलाज की जरूरत है?
हमारे समाज में, खुद से बातें करना अक्सर असामान्य या अजीब समझा जाता है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, खुद से बात करना हमेशा मानसिक बीमारी का संकेत नहीं होता। यह व्यवहार कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि अकेलापन, चिंता, या थकावट। हालांकि, जब यह आदत अत्यधिक बढ़ जाती है और आपकी दैनिक ज़िंदगी को प्रभावित करने लगती है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
डॉ. (प्रो.) राजीव मेहता का दृष्टिकोण
सर गंगा राम अस्पताल के मनोचिकित्सक और व्यवहार विज्ञान संस्थान के प्रमुख डॉ. (प्रो.) राजीव मेहता ने इस मुद्दे पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार, खुद से बात करने की आदत (Talking to Yourself) कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है:
अगर किसी व्यक्ति की खुद से बात करने की आदत उसके व्यक्तिगत, पेशेवर या सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो यह एक संकेत हो सकता है कि उसे मनोवैज्ञानिक परामर्श की आवश्यकता है। डॉ. (प्रो.) राजीव मेहता का कहना है कि ऐसे लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करनी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित मानसिक विकार की पहचान की जा सके और उचित उपचार किया जा सके।
खुद से बातें करना (Talking to Yourself) हमेशा चिंता का कारण नहीं होता, लेकिन यदि यह आदत सामान्य से बाहर हो जाए और आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करने लगे, तो इसे हल्के में न लें। उचित परामर्श और उपचार से आप अपनी मानसिक स्थिति को सुधार सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
Updated on:
24 Aug 2024 03:56 pm
Published on:
24 Aug 2024 11:49 am
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