Winter care: शरीर से आलस्य को दूर भगाते हैं ये 4 योगासन

मौसम में बदलाव से दिनचर्या में भी कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। सर्दी के मौसम में दिनभर ऊर्जावान महसूस करने वाले लोगों को इस मौसम में आलस्य आता है।

By: Hemant Pandey

Published: 15 Nov 2020, 07:48 PM IST

मौसम में बदलाव से दिनचर्या में भी कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। सर्दी के मौसम में दिनभर ऊर्जावान महसूस करने वाले लोगों को इस मौसम में आलस्य आता है। सुबह उठते समय बिस्तर छोडऩे का मन नहीं करता है। साथ ही, दिन में भी कोई काम करने की इच्छा भी कम ही होती है। ऐसे में कुछ योगासन हैं जिनसे आपके शरीर में फुर्ति आएगी।
पर्वतासन :यह आसन से श्वसन तंत्र मजबूज होता है। इससे फेफड़ों में भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन अंदर जाती है और पूरे शरीर को मिलती है। इससे ऊर्जा और शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ती है। हृदय, कंधों और हाथों को भी मजबूती मिलती है। सबसे पहले सुखासन पर बैठें। फिर सांस को भरते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं। दोनों हाथों मिलाएं। फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य हों। इस क्रिया को क्षमतानुसार 3-6 बार तक कर सकते हैं।
सर्वांगासन: इसे सर्वगुण से भरा आसन कहते हैं। इससे एंडोक्राइन सिस्टम सक्रिय होता है। शरीर सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देता है। अंदर से ऊर्जावान महसूस करते हैं। इस आसन को सावधानी पूर्वक करें। आसन कर सकते हैं। यह आसन आपके कमर, कंधे, पेट, कूल्हे और पैर की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है। शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाता है जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार बना रहता है। इससे आलस्य नहीं आता है।
त्रिकोण आसन : कमर और जांघों के पास का मोटापा कम करने के लिए यह अच्छा आसन है। इससे कमर, घुटनों और पैरों को मजबूती मिलती है। पाचन की समस्या भी दूर होती है। पाचन सही रहने से शरीर में स्फूर्ति आती है। रोजाना 2-3 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले खड़े हो जाएं और फिर आगे की ओर झुकते हुए एक हाथ से पैर के पंजे को पकड़ें। चित्रानुसार अभ्यास करना चाहिए।
भुजंगासन : शरीर को लचीला बनाए रखने और पेट की चर्बी घटाने में मदद करता है। कंधे, कमर, रीढ़ की हड्डी और गर्दन के लिए भी फायदेमंद आसन है। इससे फेफड़़ों में हवा अधिक भरती है जिससे पूरे शरीर को एनर्जी मिलती है। इसमें सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। फिर दोनों हाथों को बराबर दूरी पर रखें। पैरों के पंजे तने होने चाहिए। सांस लेते हुए सिर भुजंग (सांप) की तरह ऊपर उठाना होता है।
कोई भी आसन सीखने के बाद ही करें। ऐसा नहीं कि ये आसन तत्काल ही आराम देंगे। इसलिए इन्हें नियमित व नियमानुसार करें। तभी लाभ मिलेगा।
कमर, गर्दन, रीढ़ की हड्डी में दर्द के रोगी और गर्भवती ये आसन करने से बचें।
शरीर की क्षमता के अनुसार ही आसन करें।
आसन के लिए अच्छा समय सुबह खाली पेट होता है। यदि शाम को करते हैं खाली पेट होना जरूरी है।
खाने के 3-4 घंटे बाद ही कोई आसन करें।

Hemant Pandey
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned