34 दिन बाद गंभीर रुप से बीमार रियांशी के चेहरे पर पहली बार आई मुस्कुराहट

दुआओं का असर...गंभीर रुप से बीमार हम्माल पिता की बेटी रियांशी की सेहत में आ रहा सुधार, 34 दिन बाद पहली बार मुस्कुराई...

By: Shailendra Sharma

Published: 19 Sep 2020, 08:24 PM IST

होशंगाबाद. अस्पताल के बिस्तर पर इलाजरत रिंयाशी को नर्स दीदीयों ने जैसे ही हाय री मेरी मोंटों गाना सुनाया तो वह हंसने मुस्काराने लगी, पलक झपकाने लगी और एक टक देखने लगी। जब उससे गाना गाने को कहा तो जमकर खिल खिलाकर हंस दी। रियांशी से जब पूछा की गाना अच्छा लग रहा है तो उसने सिर हिलाकर कहा-हां। ये वो पल था जिसे देखकर इलाजरत रियांशी के माता-पिता की आंखे आंसूओं से भर आईं। रियांशी के पिता हम्माल हैं और पिछले 35 दिन से अस्पताल में भर्ती अपनी बेटी की सलामती की दुआ ईश्वर से मांग रहे हैं।

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14 अगस्त से अस्पताल में भर्ती है रियांशी
सिवनीमालवा की मंडी में हम्माल संजय कैथवास की बेटी रियांशी जीबीएस (नसें खराब होने) की गंभीर बीमारी से ग्रसित है और बीते 14 अगस्त से भोपाल के मिरैकल्स हॉस्पिटल में भर्ती है जहां बीते 34 दिनों से उसका सघन उपचार चल रहा है और अब उसकी हालत में काफी सुधार आया है। बता दें कि पत्रिका ने सामाजिक सरोकार के तहत हम्माल पिता को उसकी बेटी के इलाज के खर्च में मदद को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थी, जिसके बाद उसे मदद मिलना शुरू हुई थी। कलेक्टर धनंजय सिंह ने खबर को संज्ञान में लेकर रेडक्रास से मदद की। मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से इलाज खर्च का 3 लाख 31 हजार स्टीमेट भी भेजा। वर्तमान में उसका उपचार आयुष्मान योजना में चल रहा है।

 

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अस्पताल में मना रियांशी का जन्मदिन
उपचाररत रियांशी का जन्मदिन बीते दिनों अस्पताल की तरफ से मनाया गया। इसमें अस्पताल के एमडी डॉ. राकेश मिश्रा व स्टॉफ व परिजनों ने मिलकर केक काटा और रियांशी के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। रियांशी के स्वास्थ्य में सुधार आया है। अब वह बातें सुनने और समझने लगी है।

4.86 लाख हो चुके खर्च, सरकार से आस
रियांशी के पिता संजय कैथवास बताते हैं कि रियांशी के उपचार पर 4 लाख 86 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। लोगों की मदद से उसने 1 लाख 48 हजार जुटाए। चार लाख का कर्जा भी ले चुका है। रोजाना का इलाज खर्च 5 हजार रुपए लग रहा है। आयुष्मान योजना से इलाज का चार्ज व दवाइयां अस्पताल उठा रहा है, लेकिन ऑपरेशन, निडिल, सेनेटाइजर, डॉक्टर विजिट, ठहरने-खाने आदि का खर्च उसे उठाना पड़ रहा है। शासन की ओर से उसे अभी तक मदद नहीं मिल सकी है।

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