वेदांता की डिलिस्टिंग में LIC ने लगाया अडंगा, कंपनी को उठाना होगा अगला कदम

वेदांता के मैनेजमेंट को इस काम के लिए कुल 169.73 करोड़ शेयरों में से 134 करोड़ शेयर खरीदने आवश्यक थे परन्तु कंपनी को मात्र 126 करोड़ शेयर की ही बिड मिल सकी।

By: सुनील शर्मा

Published: 12 Oct 2020, 12:41 PM IST

अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को शेयर मार्केट में डिलिस्टिंग करवाने का प्रयास विफल हो गया था। कंपनी को डिलिस्टेड करवाने के लिए आवश्यक कुल शेयर्स नहीं मिल सके और उसे अपने प्रयास को रोकना पड़ा। उल्लेखनीय है कि वेदांता के मैनेजमेंट को इस काम के लिए कुल 169.73 करोड़ शेयरों में से 134 करोड़ शेयर खरीदने आवश्यक थे परन्तु कंपनी को मात्र 126 करोड़ शेयर की ही बिड मिल सकी। इसके लिए आवश्यक रिवर्स बुकिंग बिल्डिंग की प्रोसेस 5 अक्टूबर को खुल कर 9 अक्टूबर को बंद हुई थी।

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शेयर मार्केट से खत्म नहीं होगा कंपनी की लिस्टिंग
कंपनी ने कहा है कि वह पब्लिक की ओर से ऑफर किए गए शेयर्स को नहीं ले रही है इसलिए कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट रहेगी और पहले ही की तरह काम करती रहेगी।

LIC ने रोकी वेदांता की डिलिस्टिंग
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने वेदांता की डीलिस्टिंग रोकने में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई। LIC के पास वेदांता की 6 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। LIC ने 320 रुपए प्रति शेयर के भाव पर खरीद की थी जिसे वेदांता मात्र 87.25 रुपए प्रति शेयर में बायबैक करना चाह रही थी। इस तरह आज की तारीख में LIC को लगभग तीन चौथाई से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी कारण LIC तथा अन्य कई निवेशकों ने डीलिस्टिंग का विरोध किया था।

ये हैं डिलिस्टिंग के नियम
सेबी के नियमों के अनुसार किसी भी कंपनी को डीलिस्टेड होने के लिए 90 फीसदी शेयर धारकों की अनुमति चाहिए। इसके लिए उनके स्पेशल रिजोल्यूशन पोस्टल बैलेट लाना होगा। यदि 90 फीसदी से अधिक शेयरधारक कंपनी को इस बात पर अपनी अनुमति दे देते हैं तो कंपनी डिलिस्टेड हो सकती है और वह प्राइवेट कंपनी के रूप में बदल सकती है।

सुनील शर्मा
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