दिनों दिन खस्ता हाल हो रही पावरलूम व्यवसाय की हालत

दिनों दिन खस्ता हाल हो रही पावरलूम व्यवसाय की हालत
-सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं संचालक
-लाखों पावरलूम इकाइयां बंद होने से श्रमिकों के आजीविका पर संकट
कोल्हापुर

S F Munshi

February, 1409:36 PM

दिनों दिन खस्ता हाल हो रही पावरलूम व्यवसाय की हालत
-सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं संचालक
-लाखों पावरलूम इकाइयां बंद होने से श्रमिकों के आजीविका पर संकट
कोल्हापुर
पिछले चार वर्ष से नोटबंदी और जीएसटी की मार झेल रहे इचलकरंजी वस्त्रोद्योग पर वर्तमान मंदी ने कोड़ में खाज का काम किया है। यह उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। बाजार में मांग काफी कम हो गई है, इस वजह से उत्पादन भी नहीं हो पा रहा है।
हैंडलूम कारोबारी लंबे समय से नोटबंदी और जीएसटी में फंसे उद्योग के देर-सबेर उबरने की आस में जैसे-तैसे दिन निकाल रहे थे, लेकिन इस मंदी ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इस उद्योग से जुड़े लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं, यहां तक कि इन श्रमिकों को परिवार के पालन-पोषण में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इचलकरंजी शहर में लगभग एक लाख साधे पावरलूम और 20 हजार ऑटोलूम हैं। इनमें लगभग ७0 हजार कामगार काम करते हैं। यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि इस उद्योग में एक व्यक्ति कम से कम एक और अधिकतम ८ पावरलूम पर अकेले ही काम कर सकता है। इसके अलावा पावरलूम से जुडे सायजिंग, प्रोसेसिंग, गारमेंट व सूत गिरणी जैसे कार्य के साथ भी हजारों कामगार जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र में खेती के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाले इस उद्योग की स्थिति बहुत ही दयनीय बनी हुई है।
पारंपरिक व्यवसाय होने एवं इससे जुड़े कई श्रमिकों का घर चलाने की जद्दोजहद कई संचालक कर रहे हैं, लेकिन यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में मजबूरन इन संचालकों को पावरलूम बंद करने ही पड़ेंगे। पावरलूम संचालक बुरी तरह कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और इसी उम्मीद में जैसे-तैसे इस बोझ को ढोने को मजबूर हैं कि शायद आने वाले दिनों में सरकार इनकी सुध लेगी और इनकी हालत में सुधार होगा।
चार साल पहले तक इचलकरंजी में 10 से 12 तरह का कपड़ा इन पावरलूम में तैयार होता था, जबकि वर्तमान में सिर्फ दो-तीन तरह के कपड़े की ही थोड़ी बहुत मांग है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हैंडलूम उद्योगों की हालत कैसी है। इस उद्योग से जुड़े कई संचालकों ने तो अपने प्रतिष्ठान दूसरे व्यापारियों को किराए पर दे दिए हैं और कई मजबूरन दूसरा कामधंधा शुरू करने को विवश हो रहे हैं।
देश के दूसरे राज्यों की तुलना में यहां बिजली की दरें भी अधिक हैं। उत्पादन की लागत भी अधिक आती है। ऐसी स्थिति में यह उद्योग लगभग बंद होने की कगार पर है। दुनिया के अन्य देशों में पावरलूम उद्योग को विशेष सहुलियतें दी जाती हैं, ताकि देश की अर्थ व्यवस्था मजबूत हो सके और लोग भी आत्मनिर्भर बन सकें। हैंडलूम संचालक अभी भी सरकारों की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि शायद सरकार इस संकट से उभरने में उनकी मदद अवश्य करेगी।
भारत से सस्ता कपड़ा चीन का
पावरलूम कामगारों का कहना है कि देश में तैयार होने वाले कपड़े की तुलना में चीन का कपड़ा सस्ता मिलता है। इसकी वजह यह है कि चीन में कामगारों को कम मेहनताना देना पड़ता है। इसके अलावा उत्पादन की लागत भी कम होती है। इसकी विशेषता यह है की निर्यात करने वाले उद्यमियो ंको कस्टम ड्यूटी पर छूट मिलती है। इसलिए वहां के उत्पादक उत्पाद खर्च से कम खर्चे में कपड़ा निर्यात करते हैं। कस्टम ड्यूटी पर छूट की वजह से इन उत्पादकों को मुनाफा भी अधिक होता है।
उत्पाद कम करना संभव नहीं
मालेगांव में एक-दो प्रकार के कपड़े का ही उत्पादन होता है, उसकी भी मांग नहीं होने के कारण उत्पादन बंद करने का फैसला किया गया। वहीं इचलकरंजी में 10 से 12 तरह के कपड़े का उत्पादन होता है, उसकी भी पर्याप्त मांग नहीं होने से उत्पाद बंद करना संभव नहीं है। फिलहाल सरकारी मदद की उम्मीद में बैठे हैं।
-विनय महाजन, अध्यक्ष-पावरलूम जागृति संगठन
एक होने की जरूरत
पावरलूमधारक और इससे जुड़े अलग-अलग संगठनों को ऐसी स्थिति से उबरने के लिए एकजुट होने की जरूरत है। उसके लिए सभी संगठनों को साथ में बैठकर इस बारे में कोई ठोस रणनीति बनाने पर चर्चा करनी चाहिए।
-सतीश कोष्टी, अध्यक्ष इचलकरंजी पावरलूम एसोसिएशन

S F Munshi Reporting
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