scriptEven after four years, government offices limited to nameplates | चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय | Patrika News

चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय

चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय
-कार्यालय पर निर्भर 63 गांव के लोगों
रट्टीहल्ली

हुबली

Published: January 14, 2022 11:23:20 am

चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय
रट्टीहल्ली
नए तालुक के रूप में रट्टीहल्ली को परिवर्तित हुए चार साल बीत चुके हैं परंतु आज भी रट्टीहल्ली में सुविधाओं की किल्लत है। तालुका के 63 गांव के लोगों को सरकारी कार्यों के लिए ररट्टीहल्ली तालुक कार्यालय पर निर्भर रहना पड़ता है।
कार्यालय शहर से तीन किमी की दूरी पर स्थित होने की वजह से कार्यालय आने वाले कर्मचारियों को कई समस्याओं को सामना करना पड़ रहा है। विधवा पेंशन, विकलांग वेतन, जाति तथा आय पुष्टिकरण, वृध्दावस्था वेतन, संध्या सुरक्षा वेतन, किसान पुष्टिकरण पत्र, भूमि पट्टे की पुष्टि इसी प्रकार अनेक कार्य के लिए प्रतिदिन असंख्य लोगों को तहसीलदार कार्यालय आना ही पड़ता है।
चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय
चार साल बाद भी नेमप्लेट तक ही सीमित सरकारी कार्यालय
बारिशों में छत से टपकता है पानी

पंचायतराज इंजीनियरिंग विभाग, ग्रामीण पेयजल तथा स्वच्छता विभाग, शिशु विकास योजना अधिकारी कार्यालय, समाज कल्याण विभाग, पंजीयन अधिकारी कार्यालय, कृषि निदेशक कार्यालय इसी प्रकार कई केंद्र कार्यालयों को चिन्हित कर बोर्ड लगाया गया है। कार्यालय की इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी है। कार्यालय की खिड़कियां, दरवाजे टूट चुके हैं। चारों ओर जंगली पेड़-पौधे उगे हैं जिसकी वजह से यह स्थान जहरीले जीव-जंतु के आश्रय के रूप में परिवर्तित हो चुका है। बारिश के दिनों कई इमारतों में ऊपर से पानी टपकता है। तहसीलदार कार्यालय, सिंचाई विभाग, रसद विभाग, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, राजस्व अधीक्षक कार्यालय की सेवाएं यहां शुरू हो चुकी है।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव

अटलजी जनस्ेही केंद्र आने वाले लोगों के लिए बैठने योग्य उपयुक्त व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिकों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। शौच के लिए खुले में ही जाना पड़ता है। प्रतिदिन दैनिक कार्य के लिए आने वाली महिलाओं को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। कार्यालय के प्रांगण में वाहन पार्किंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोग तहसीलदार कार्यालय के सामने वाहन पार्किंग करते हैं।
नहीं है पेयजल की व्यवस्था

ग्रामीण क्षेत्र में बिजली की समस्या बार-बार होती है। अत: इसके चलते तहसीलदार कार्यालय में ही ग्रामीणों को दिन गुजारना पड़ता है। सुरक्षा के अभाव के चलते रात को तहसीलदार कार्यालय शराब तथा जुए के अड्डे के रूप में परिवर्तित हो जाता है।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

कोरोना: शनिवार रात्री से शुरू हुआ 30 घंटे का जन अनुशासन कफ्र्यूशाहरुख खान को अपना बेटा मानने वाले दिलीप कुमार की 6800 करोड़ की संपत्ति पर अब इस शख्स का हैं अधिकारजब 57 की उम्र में सनी देओल ने मचाई सनसनी, 38 साल छोटी एक्ट्रेस के साथ किए थे बोल्ड सीनMaruti Alto हुई टॉप 5 की लिस्ट से बाहर! इस कार पर देश ने दिखाया भरोसा, कम कीमत में देती है 32Km का माइलेज़UP School News: छुट्टियाँ खत्म यूपी में 17 जनवरी से खुलेंगे स्कूल! मैनेजमेंट बच्चों को स्कूल आने के लिए नहीं कर सकता बाध्यअब वायरल फ्लू का रूप लेने लगा कोरोना, रिकवरी के दिन भी घटेCM गहलोत ने लापरवाही करने वालों को चेताया, ओमिक्रॉन को हल्के में नहीं लें2022 का पहला ग्रहण 4 राशि वालों की जिंदगी में लाएगा बड़े बदलाव

बड़ी खबरें

पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक मामले की जांच कर रहीं जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ ने दी धमकीहरक रावत की बीजेपी से छुट्टी पर सीएम पुष्कर धामी का बड़ा बयान, बोले- पार्टी पर बना रहे थे दबावपंजाब में टल सकते हैं चुनाव! चन्नी सरकार की मांग पर चुनाव आयोग की अहम बैठक आजभारत में एक दिन में कोरोना के 2.71 लाख नए मामले आए सामने, 314 की मौतPandit Birju Maharaj: कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज का निधन, 83 साल की उम्र में ली अंतिम सांससीएम की बड़ी घोषणा, पंचों-सरपंचों को फिर मिले ये अधिकारUP Election 2022- 'आप' ने उतारे प्रत्याशी, वाराणसी से डॉक्टर, वकील, समाजसेविका और पार्षद को टिकट, जानें सभी के बारे मेंBSP की पटरी पर दौड़ेगी 550 मेगा पास्कल से भी अधिक स्पीड में ट्रेन, रेलवे की जरूरत पर पहली बार किया तकनीक में बदलाव
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.