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आगजनी की घटनाओं से सबक लेने की जरूरत, जरूरी उपाय से जान-माल की क्षति से बचा जा सकता है

गुजरात के राजकोट के बाद दिल्ली में हुई आगजनी की घटना से समूचे देश का ध्यान खींचा है। अक्सर गर्मी के दिनों में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में समय रहते सचेत रहना जरूरी है। कुछ खास उपाय यदि समय रहते कर लिए जाएं तो जान-माल से बचा जा सकता है।

हुबलीMay 28, 2024 / 06:08 pm

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

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फायर एनओसी तक नहीं होती
अक्सर कई बार अग्नि दुर्घटनाओं का कारण शॉर्ट सर्किट रहता है। ऐसे में घरों, प्रतिष्ठानों एवं अन्य जगहों पर अच्छी गुणवत्ता के वायर काम में लें। सस्ते व घटिया गुणवत्ता के इलेक्ट्रिक वायर नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार सामने आता है कि एयर कंडीशनर में आग लग जाती है। कमोबेस अधिकांश अस्पतालों में लोगों की जान बचाने के संसाधन ही नहीं होते। फायर एनओसी तक नहीं होती। ऐसे में अस्पतालों में आग लग जाने की वारदात पर मरीज व कर्मचारियों का निकलना व बचना मुश्किल होता है। अस्पतालों की आपात स्थित भगवान भरोसे ही होती है। दिल्ली के अस्पताल में हुई आगजनी की घटना के बाद अन्य अस्पतालों में व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। अस्पताल में आग की यह कोई पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी अस्पतालो में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। कई अस्पतालों में सेफ्टी को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है। कई अस्पतालों में तो मरीज ऐसे भी होते हैं चलने-फिरने में असमर्थ होते हैं। ऐसे में उन मरीजों को बाहर निकालने का काम भी काफी मशक्कत भरा हो सकता है। इसके लिए पहले से ही बनाई गईं खास आपातकालीन योजनाओं की जरूरत होती है। बच्चों के अस्पताल में तो यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। आग लगने पर मरीजों को बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन और दमकल कर्मचारियों के बीच सावधानीपूर्वक योजना बनानी बहुत जरूरी है। ज्यादातर अस्पतालों में आग से बचाव के लिए सही इंतजाम नहीं होते हैं। कई अस्पतालों की सीढिय़ां भी बहुत संकरी होती है।
अलग-अलग हिस्से बनाएं
दमकल विभाग की मानें तो अस्पतालों में हर मंजिल पर अलग-अलग हिस्से बनाए जाने चाहिए। इससे आग लगने पर मरीजों को जल्दी से जल्दी सुरक्षित जगह पर ले जाया जा सकता है। आग लगने पर फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए करीब पांच से छह मिनट का ही समय होता है। इसलिए अस्पताल के अलग-अलग हिस्से बनाने बहुत जरूरी हैं। इस तरह आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोकी जा सकती है। अस्पताल में आग लगने पर धुआं निकालने के लिए सही तरीके से बने रास्ते होने भी बहुत जरूरी हैं ताकि धुआं जमा ना हो।
कर्नाटक में पिछले दिनों हुए हादसों की बानगी:

कर्नाटक के बीदर के ज्योति कॉलोनी परिसर में एक दिन पहले एक ट्रांसफॉर्मर मरम्मत केंद्र में आकस्मिक आग लग गई। केंद्र में किसानों के खेतों में खराब ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत की जाती है। आग लगने से कई ट्रांसफॉर्मर, भारी मात्रा में डीजल, बिजली के तार पूरी तरह जल गए। चालक दल के छह सदस्य सुरक्षित बच गए।आग ट्रांसफॉर्मर मरम्मत केंद्र से लेकर अन्य कार्यालयों तक फैल गई। आग में एक पुरानी जीप पूरी तरह जलकर खाक हो गई। वहां खड़ी जेसकॉम अधिकारियों की कई कारों में आग लगने वाली थी जिसे दमकल कर्मियों ने बुझा दिया। इससे ज्यादा नुकसान होने से बच गया। हर तरफ भारी मात्रा में आग और घना धुआं होने पर आसपास के लोग वहां दौड़ पड़े। आग को पूरी तरह से बुझाने के लिए एक घंटे से अधिक समय तक मशक्कत की। तेज धूप और घने धुएं के कारण दमकल कर्मियों को काफी पसीना बहाना पड़ा।
पिछले दिनों कर्नाटक के बल्लारी में बड़ा हादसा हो गया। यहां टेरू स्ट्रीट पर स्थित ज्वैलर्स के शोरूम में एक एयर कंडीशनर में धमाका हो गया। हादसे में 3 लोग घायल हुए। सभी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। धमाके के बाद शोरूम में धुआं-धुआं हो गया। धमाका इतना तेज था कि खिड़कियों में लगे शीशे बुरी तरह टूट गए। हादसे की सूचना पर पुलिस और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। हालांकि धमाके के बाद शोरूम में आग नहीं लगी।
इमारतों में ऐसे बनाएं सुरक्षा

  • सुनिश्चित करें कि आग बुझाने के यंत्र आसानी से मिल सकें और उनकी नियमित देखरेख हो
  • नियमित रूप से बिजली के तारों और उपकरणों की जांच कराएं
  • ज्वलनशील पदार्थों को चिन्हित, सुरक्षित जगहों पर ही रखें
  • आपातकालीन निकास मार्ग को हमेशा खाली रखें
  • छत को ताला न लगाएं और सीढिय़ों पर कोई सामान नहीं रखें
  • आधुनिक स्मोक डिटेक्टर, सेंसर और फायर अलार्म लगाए
बंद जगह में आग लगने पर यह करें
  • जल्दी से जल्दी वहां से बाहर निकल जाएं
  • सीढिय़ों का इस्तेमाल करें
  • घबराकर इमारत से बाहर ना कूदें
  • अगर बाहर निकलने का रास्ता बंद हो तो खिड़की के पास खड़े हों और कांच तोड़ दें
लोगों को सचेत व जागरूक रहने की जरूरत
हुब्बल्ली के उद्योगपति राजस्थान के मोकलसर मूल के रमेश बाफना कहते हैं, मौजूदा समय में आग की घटनाएं अधिक हो रही है। ऐसे में लोगों को सचेत एवं जागरूक रहने की जरूरत अधिक है। अपने प्रतिष्ठान, गोदाम व दुकानों में भी अग्निशमन संयंत्र जरूर रखने चाहिए। खासकर बड़े गोदाम में ऐसे संयंत्र निश्चित रूप से होने चाहिए। लोगों को आग के बचाव की टे्रेनिंग दी जाएं। विभिन्न जगहों पर काम करने वाले श्रमिकों को भी प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है ताकि किसी अनहोनी में वे अपना बचाव कर सकें। खासकर सेफ्टी के विशेष इंतजाम तो किए ही जाने चाहिए। सुरक्षा प्राथमिकता में होनी चाहिए।

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