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अयोध्या की तरह MP में भी है ‘श्री राम भव्य मंदिर’, एक ही दिन हुआ था भूमिपूजन, 1.50 करोड़ से बना है मंदिर

महादान से तैयार हुआ भव्य मंदिर : किसानों से प्रति बीघा के हिसाब से लिए गए 4200 रुपए

इंदौरApr 17, 2024 / 09:06 am

Ashtha Awasthi

Ayodhya

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इंदौर। अयोध्या की तर्ज पर इंदौर में ‘महादान’ से भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। मंदिर में मंगलवार को भगवान श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। शहर से 12 किमी दूर सिंदौड़ा गांव में बने मंदिर में अयोध्या के मंदिर की तरह पांच शिखर भी हैं। मंदिर में निर्माण में किसानों ने प्रति बीघा जमीन पर 4200 रुपए के हिसाब से दान दिया है। पीतल के कलश, घंटा व ध्वज रतलाम से लाए गए हैं। बुधवार को राम नवमी पर महाआरती की जाएगी।

1.50 करोड़ से बना है मंदिर

ग्रामीणों ने बताया, मंदिर बनाने के लिए प्रति बीघा के हिसाब से एक घर से 4200 रुपए का चंदा लिया गया है। जिनके पास जमीन नहीं, उन्होंने इच्छा से 11, 21 व 51 हजार भी दिए हैं। 1.50 करोड़ की लागत से मंदिर बना।
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अयोध्या और यहां एक ही दिन हुआ भूमिपूजन

मंदिर की खास बात है कि 5 अगस्त 2020 अयोध्या में श्रीराम मंदिर का भूमिपूजन हुआ था, उसी दिन यहां के मंदिर का भी भूमिपूजन किया गया था। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी थी, लेकिन किसी कारणवश नहीं हो सकी। तभी से ग्रामीणों ने तय किया कि रामनवमी पर भगवान श्रीराम को विराजमान करेंगे।

33 इंच की मूर्तियां स्थापित

अयोध्या की तर्ज पर बना श्रीराम मंदिर 3200 वर्ग फीट में फैला हुआ है। राजस्थान से मंगवाकर स्थापित की गईं मूर्तियों की ऊंचाई करीब 33 इंच है। मंदिर में सीता-राम-लक्ष्मण, हनुमान, मां सरस्वती और भगवान गणेश की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। मूर्तियों को मंगाने में 3 लाख 1 हजार रुपए का खर्च आया है।

ये है खासियत

-18 फीट नीचे तक खुदाई कर काम पहाड़ी ख्रलैक स्टोन से भरा गया।
-जमीन से करीब 4 फीट उपर तक लेवल किया गया।
-मंदिर का बेस 22 फीट का है।
-मंदिर में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया। पत्थर पर लॉकिंग सिस्टम से बनाया गया।

वास्तु, शिल्प, ज्योतिष और नागर शैली में बना मंदिर

मंदिर का निर्माण करने वाले इंजीनियर सोमपुरा के अनुसार, उङार भारत की नागर शैली व वास्तु, शिल्प और ज्योतिष के हिसाब से मंदिर का निमार्ण किया गया है। जिन कारीगरों ने अयोध्या में मंदिर बनाया, उन्हीं के रिश्तेदारों ने इस मंदिर को बनाने में काम किया है।

100 कर्मियों ने किया काम

मंदिर निर्माण के लिए तीन टीमें बनाई गईं। पहली टीम डिजाइन के बाद पत्थर काटती थी। दूसरी टीम गढ़ाई करती थी। तीसरी टीम पत्थर को असेंबल करती थी। 100 से ज्यादा कर्मचारी काम में लगे थे।

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