गर्भवती के पेट पर लात मारने वाला निकला पाकिस्तानी

गर्भवती के पेट पर लात मारने वाला निकला पाकिस्तानी

Mohit Panchal | Publish: Sep, 07 2018 11:01:01 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

कार पर मामूली स्क्रैच लगने के बाद चौकीदार व उसकी पत्नी को था पीटा, नागरिकता नहीं, फिर भी मकान, दुकान व पैनकार्डधारी

मोहित पांचाल
इंदौर। कार पर मामूली स्क्रैच लगने के बाद चौकीदार को बुरी तरह पीटने और उसकी गर्भवती पत्नी के पेट पर लात मारने वाला पाकिस्तानी है। उसे भारत की नागरिकता नही, फिर भी उसने गैर कानूनी तरीके से मकान व दुकान खरीदे। पैनकार्ड भी बनवा लिया।

त्रिवेणी कॉलोनी के वृंदावनधाम अपार्टमेंट में सोमवार रात कार में स्क्रैच लगने के बाद मुकेश वाधवानी, दीपक चावला व साथियों ने चौकीदार अजय उर्फ कामताप्रसाद गौतम की पिटाई कर दी थी। पति की बेरहमी से मारपीट होती देख गर्भवती पत्नी सपना बचाने पहुंची तो गुस्साए वाधवानी ने उसके पेट पर लात मार दी, जिससे बच्चे की मौत हो गई।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इधर, मामले को रफादफा करने के लिए भाजपा से जुड़े कुछ लोगों ने चौकीदार पर दबाव बनाने का प्रयास किया। एक पार्षद की ओर से तो मामले को रफादफा करने के लिए लेनदेन का लालच भी दिया जा रहा है।

चौंकाने वाली बात ये है कि आरोपी वाधवानी पाकिस्तानी नागरिक है। भारत की नागरिकता को लेकर उसने जिला प्रशासन को आवेदन दे रखा है, लेकिन एक आपत्ति के चलते निराकरण नहीं हुआ है। इससे पहले ही वाधवानी ने मकान व दुकान लेकर कारोबार करना शुरू कर दिया।

कानून के मुताबिक विदेशी नागरिक न तो भारत में संपत्ति खरीद सकता है, न ही बिना सरकार की अनुमति के काराबोर कर सकता है। सारी संपत्ति फर्जी तरीके से खरीदी गई। बड़ी बात तो ये है कि फर्जी तरीके से पैनकार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाया। प्रशासन व पुलिस गंभीरता से जांच करे तो कई और बड़े खुलासे भी हो सकते हैं।

व्यापमं घोटाले के आरोपी पंकज त्रिवेदी से खरीदा मकान
गर्भवती के पेट में पल रहे बच्चे की हत्या करने वाले वाधवानी के साथ एक ओर घोटाला जुड़ा हुआ है। उसने रूपराम नगर में व्यापम घोटाले के मुख्य आरोपी पंकज त्रिवेदी से मकान खरीदा है। उक्त मकान बाबा गुरुमुखदास ट्रस्ट के नाम पर लिया गया है, जिसमें वाधवानी भी ट्रस्टी है। मकान खरीदने के बाद में फर्जी तरीके से उसने ट्रस्ट का पंजीयन करा लिया। पाकिस्तानी नागरिक होकर वे ट्रस्टी नहीं बना सकते थे, जिसको लेकर आपत्ति ली गई तो रजिस्ट्रार ने पंजीयन निरस्त कर दिया। अब अवैध रूप से गतिविधि संचालित की जा रही है।

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