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‘नो हॉर्न जोन’ में 1 मिनट में 30 से अधिक बार बज रहे कान फोड़ू हॉर्न

अस्पतालों में भी चैन नहीं, कब सुनेंगे जिम्मेदार...

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Mar 23, 2024

‘नो हॉर्न जोन’ में 1 मिनट में 30 से अधिक बार बज रहे कान फोड़ू हॉर्न

इंदौर. जिम्मेदारों विभागों की अनदेखी का खामियाजा अब हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को भी भुगतना पड़ रहा है। नियम के मुताबिक, जिस स्थान पर हॉस्पिटल हैं, वहां वाहनों के कान फोड़ू हॉर्न (प्रेशर हार्न) वर्जित हैं। इसके बाद भी वाहन चालक प्रेशर हॉर्न बजाने से बाज नहीं आ रहे हैं। चालानी कार्रवाई में व्यस्त पुलिस का भी इस ओर ध्यान नहीं।
पत्रिका ने शहर के ‘नो हॉर्न जोन’ में शामिल एमवाय हॉस्पिटल के समीप रोड को स्कैन किया, जिसमें निजी और व्यावसायिक वाहनों से हॉर्न की आवाज से मार्ग गूंजता रहा। कैमरे में वीडियो रिकॉर्ड करने पर पता चला कि एक मिनट में करीब 30 से अधिक बार हॉस्पिटल के सामने वाहनों ने तेज हॉर्न बजाया। हॉस्पिटल के प्रवेश द्वार के समीप बस स्टॉप है। ऐसे में यहां भी बसों के कान फोड़ू हॉर्न बजते रहे। जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा अब गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज भुगत रहे हैं। दर्द से कराह रहे मरीजों को हॉर्न की अवाज किसी सुई से कम नहीं चुभती होगी, वहीं राह चलते लोगों को लिए भी यह परेशानी बन रहे हैं। सवाल यह है कि शहर के जिम्मेदारों को यह शोर क्यों नहीं सुनाई दे रहा या वे सुनकर भी अनजान बने बैठे हैं।

बोर्ड पर लिखी सूचना बेअसर
मार्ग पर केवल एक स्थान पर बोर्ड लगा है, जिसमें मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190 (2) के अंतर्गत हॉर्न बजाना मना है। निजी वाहन पर 1 हजार और व्यावसायिक वाहनों पर 3 हजार जुर्माना लगेगा।

110 डेसीबल आवाज वाले हॉर्न बढ़ा रहे परेशानी
पुलिस की मानें तो कार का हॉर्न बजने पर 110 डेसीबल रिङ्क्षडग आती है जो हवाई जहाज से निकली आवाज से महज 10 डेसीबल कम होती है, लेकिन इसके बाद भी इसे लोग बिना वजह सडक़ों और नो हॉर्न जोन जैसे हॉस्पिटल के आसपास बजा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक भी इस बात का खुलासा कर चुके हैं कि 70 से अधिक डेसीबल का साउंड लोगों में चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद नहीं आना जैसी समस्याएं पैदा कर रहा है।

बस स्टैंड शिफ्ट करने के लिए निगम को लिखे कई पत्र
एमवायएच के सामने वाहनों से निकल रही तेज आवाज से मरीज परेशान हैं। इस संबंध में दो से तीन बार निगमायुक्त से पत्र व्यवहार किया है। इसमें एमवायएच के 2 नंबर गेट के समीप स्टैंड को 3 नंबर गेट के पास तो वहीं 4 नंबर गेट के समीप स्टैंड को 5 नंबर गेट के पास शिफ्ट करने को कहा गया। संबंधित गेट पर वाहन, बस अधिक संख्या में पहुंचते हैं, जिससे एंबुलेंस को निकलने में परेशानी होती है और वाहनों से निकलने वाली तेज आवाज से मरीज परेशान हो रहे हैं।
- डॉ. पीएस ठाकुर, अधीक्षक, एमवायएच

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