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VIDEO : इस मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहे श्रीकृष्ण के दर्शन, जानिए वजह..

जीर्णोद्धार के काम के कारण आवागमन का अलग रास्ता बनाया,आग बुझाने के लिए भी किए पर्याप्त इंतजाम

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Gopal Mandir

गोपाल मंदिर में भक्तों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम

इंदौर. श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आज और कल मनाया जाएगा। राजबाड़ा के पास स्थित गोपाल मंदिर में आज जन्मोत्सव मनेगा। दर्शन के लिए लोगों की कतार सुबह से मंदिर में लगने लगी है, जो रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाने तक रहेगी। नगर निगम ने यहां पुलिस सुरक्षा के खास इंतजाम किए हैं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत गोपाल मंदिर के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। इसकी वजह से दर्शन करने वालों को कोई परेशानी न हो और काम के चलते उन्हें सुरक्षा मिले, इसके इंतजाम नगर निगम ने किए हैं। महापौर मालिनी गौड़ और आयुक्त आशीष सिंह के निर्देश पर व्यापक व्यवस्था करते हुए मंदिर परिसर में विद्युत सज्जा, टेंट लगाकर बैरिकेडिंग और भक्तों के आगमन व निकासी के लिए विशेष मार्ग तैयार कर सुरक्षित किया गया है। आग बुझाने के उपकरणों का इंतजाम भी पूरे परिसर में किया गया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधीक्षण यंत्री महेश शर्मा ने कहा कि वर्ष 1832 में कृष्णाबाई होलकर द्वारा निर्मित किए गए गोपाल मंदिर व परिसर के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। इसके तहत मुख्य मंदिर को एक वर्ष की अवधि में मूल स्वरूप में लाया जाएगा जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए मंदिर में विशेष सजावट करने के साथ भक्तों के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।

नहीं लगने देंगे दुकान

जीर्णोद्धार के चलते निगम ने बड़ी संख्या में दुकानें हटाईं। बावजूद इसके गोपाल मंदिर के आसपास दुकाने लगने लगीं। राखी के दौरान निगम ने खुद दुकानें लगवाईं थीं, ताकि लोगों को खरीदारी करने में सुविधा हो, लेकिन आज और कल जन्माष्टमी पर्व मनाने के चलते यहां दुकानें नहीं लगने दी जाएंगी। इसके लिए निगम रिमूवल विभाग को निर्देशित कर दिया है कि मंदिर के आसपास लगने वाली दुकानों को हटाया जाए।

काम ने पकड़ी तेजी

मंदिर के कायाकल्प ने अब रफ्तार पकड़ ली है। मंदिर में से बड़ी मात्रा में लकड़ी निकली है। उपयोगिता के हिसाब से लकड़ी को आकार देकर इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर परिसर के बाहरी भाग की दीवारों की जुड़ाई व प्लास्टर चूने से हुआ है, इसलिए जीर्णोद्धार में भी चूने का ही उपयोग हो रहा है। प्लास्टर के लिए राजस्थान से चूना बुलाया गया है। दीवारें खराब हो चुकी हैं, जिसे ठीक किया जा रहा है। प्लास्टर के लिए चूने में रेत के बजाय ईंट का चूरा मिलाया जा रहा है। इसे लाइम-सुर्खी का प्लास्टर कहा जाता है। जीर्णोद्धार के चलते मंदिर को पुराने स्वरूप में ही लाने में निगम लगा है, इसलिए पुराने समय जिस हिसाब से काम हुआ, उसके हिसाब से अब काम किया जा रहा है।

बांके बिहारी मंदिर भी खोला
जन्माष्टमी के लिए बांके बिहारी मंदिर सज गया है। आइडीए ने अपनी तरफ से मुख्य हॉल का काम पूरा करके जन्माष्टमी के लिए खोल दिया है। मंदिर के मुख्य हॉल की सुंदर सजावट की गई है और कल से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिर में सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं कमिश्नर कार्यालय की तरफ से की गई हैं।

राजबाड़ा के बांके बिहारी मंदिर का काम आइडीए को मिला था। आइडीए ने बारिश के पहले इसकी छत डलवा दी थी और जन्माष्टमी के पहले काम पूरा करने का दावा किया था। दावे को निभाते हुए 85 फीसदी से ज्यादा काम पूरा कर दिया और कृष्ण जन्मोत्सव मनाने के लिए मंदिर को खोल दिया गया है। मंदिर में भक्तों के आने और जाने के लिए दो निकास बनाए गए हैं। मुख्य द्वार से भक्तों के आने का और पीछे के द्वार से निकासी की व्यवस्था की गई है, ताकि व्यवस्था गड़बड़ाए न और सभी को बांके बिहारी के सहज दर्शन हो सकें।

इस युग की मीरा, हर साल सजाती हैं मंदिर
बांके बिहारी मंदिर की सजावट हर साल एक महिला करती हैं। वे बांके बिहारी की अनन्य भक्त हैं और जन्माष्टमी के दो दिन पहले मंदिर की सजावट कर देती हैं। इसके बाद भी न तो वे सामने आना चाहती हैं और न ही अपना नाम उजागर करना चाहती हैं। इस साल भी बांके बिहारी मंदिर में नजर आने वाली सुंदर सजावट इन्हीं ने की है। मंदिर की पुजारी बाईजी ने बताया कि हर साल उत्सव के पहले खुद ही आ जाती हैं और तन्मयता से सजावट का काम करती हैं।