Fridge, Washing Machine और दवाई, Coronavirus बढ़ाएगा सभी में महंगाई

  • चीनी सप्लायर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े सामान की बढ़ा सकते हैं कीमत
  • भारत सामान के निर्माण के लिए चीन से मंगाता है 70 फीसदी कच्चा माल
  • फिक्की रिपोर्ट, उद्योग संगठन 9 लाख करोड़ के राहत पैकेज की कर रहा है

By: Saurabh Sharma

Updated: 09 Apr 2020, 07:31 AM IST

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कुप्रभाव अब आम जनता के जीवन में दिखाई देने जल्द शुरू हो जाएंगे। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आईएलो जहां 40 करोड़ लोगों की नौकरियों पर खतरा मंडराने की बात कर रहा हैं। अब कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के सामान और दवाओं की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसा चीन की वजह से होने जा रहा है। चीनी साप्लयर्स ने कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े साजो-सामानों की कीमत बढ़ाने की बात की है। अगर ऐसा होता है तो भारत जैसे देश में घर में इस्तेमाल होने वाले गुड्स और दवाओं की कीमत में बेतहाशा की कीमत में इजाफा हो सकता है। इसका एक कारण यह भी भारत कच्चे माल के लिए चीन पर करीब 70 फीसदी तक निर्भर है। ऐसे में देश में महंगाई में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल सकता है।

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फिक्की के प्रेजेंटेशन में भयावह तस्वीर
फिक्की ने केंद्र सरकार को दिए प्रेंजेंटेशन में कहा है कि चीपी सप्लायर टीवी पैनल की कीमतों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसके अलावा बाकी कंपोनेंट की कीमतों में 2 फीसदी का इजाफा हो चुका है। प्रेजेंटेशन के अनुसार इस इजाफे से घरों में काम के जरूरी सामानों की कीमतों में इजाफा होगा, बल्कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग, एयर कंडिशनर आदि का प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगा। यही कारण है कि लॉकडाउन के बाद देश की इकोनॉमी में गहरे संकट की संभावना की बू महसूस की जा रही है।

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राहत पैकेज की डिमांड
फिक्की के अनुसार देश की बिगड़ती हुई इकोनॉमी को देखते हुए केंद्र सरकार को कहा कि वो इंडस्ट्री को करीब 10 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज दे। फिक्की का यह सुझाव तब आया है जब देश की सरकार खुद इस मामले में कदम उठाने की योजना बना रही है। जानकारी के अनुसार देश की सरकार उद्योग को 2 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। जो फिक्की की डिमांड से 5 गुना कम है। जानकारों की मानें तो भारत सरकार ने बाकी देशों के मुकाबले काफी कम राहत पैकेज दिया है।

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चीन से आता है 70 फीसदी कच्चा माल
भारत इलेक्ट्रोनिक गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए कच्चा माल चीन से मंगाता है। करीब 70 फीसदी डिपेंडेंसी चीन से ही देखने को मिलती है। वहीं 45 फीसदी सामान तो पूरी तरह से बना हुआ ही होता है। यहां यह बताना काफी जरूरी है कि कच्चे माल की कीमतों में तेजी ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब घरेलू बाजार इन सामान की कीमतों में कटौती देखने को मिली है।

दवाओं का कच्चा माल भी होगा महंगा
वहीं दूसरी ओर चीन की ओर से कुछ एक्टिव फार्मा इंग्रेडिएंट यानी एपीआई की कीमतों इजाफा किया गया है। यह इजाफा 40 से 50 फीसदी तक किया गया है। एक्टिव फार्मा इंग्रेडिएंट का इस्तेमाल दवाएं बनाने में किया जाता है। आपको बता दें कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जो दवाओं का निर्यात बड़ी मात्रा में करता है। दवाओं को बनाने के लिए भारत का अधिकतर कच्चा माल चीन से ही आता है।

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