Knight Frank Report : बीते 6 महीनों में इन आठ शहरों में मकानों की बिक्री में 54 फीसदी की गिरावट

  • देश के प्रमुख आठ शहरों में Residential Sector में Sale घटकर 59,538, बीते एक दशक में सबसे कम
  • Property सलाहकार Knight Frank ने जारी की 'इंडिया रियल एस्टेट: एच1 2020' रिपोर्ट

By: Saurabh Sharma

Updated: 16 Jul 2020, 08:13 PM IST

नई दिल्ली। वैसे तो कोरोना वायरस ( Coronavirus Crisis ) की वजह से 2020 सभी सेक्टर के लिए काफी बुरा रहा है, लेकिन पहले से ही चोट झेल रहे रियल एस्टेट कारोबार ( Real Estate Business ) में इसने नासूर का काम किया है। नाइट फ्रैंक ( Knight Frank Report 2020 ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के आठ प्रमुख शहरों में प्रोपर्टी की बिक्री ( Property Sales Down ) में 54 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है, जोकि एक दशक का सबसे निचला स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट कोरोना वायरस लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) की वजह से देखने को मिली है। आपको बता दें कि 16 जुलाई यानी आज गुरुवार को प्रॉपर्टी सलाहकार लाइट फ्रैंक की ओर से 'इंडिया रियल एस्टेट: एच1 2020Ó रिपोर्ट जारी की। जिसमें देश के रियल एस्टेट कारोबार ( Real Estate Sector ) को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई है।

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दशक का सबसे खराब प्रदर्शन
प्रॉपर्टी सलाहकार नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के अनुसार देश के आठ प्रमुख शहरों में मकानों की बिक्री इस साल जनवरी से जून के बीच में 54 फीसदी कम होकर 59,538 यूनिट्स रह गई हैं, जोकि जो पिछले एक दशक का निचला स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार यह आंकलन दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद में जनवरी से मार्च के दौरान मकानों की बिक्री 27 फीसदी घटकर 49,905 यूनिट पर आ गई है। वहीं अप्रैल से जून के बीच बिक्री 84 फीसदी कम होकर 9,632 यूनिट्स गई। रिपोर्ट की मानें तो लॉकडाउन के बीच मांग के बुरी तरह प्रभावित होने के कारण इस तरह के आंकड़े देखने को मिले हैं।

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ज्यादा प्रभावित हुआ रियल एस्टेट कारोबार
नाइट फ्रैंक इंडिया के सीएमडी शिशिर बैजल के अनुसार रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर काफी समय से संकट के दौर से गुजर रहा है। अब कोरोना वायरस ने इस सेक्टर पर और गहरी चोट कर दी है। वैसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से रेपो दरों में कटौती के साथ लिक्विडिटी बढ़ाने पर भी जोर दिया है, लेकिन सरकार के तुरंत साथ देने की जरुरत है।शिशर के अनुसार उन्हें भरोसा है कि सरकार अब सेक्टर में सकारात्मक फैसले लेते हुए बायर्स और डेवलपर्स दोनों के हित के बारे में काम करेगी।

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