जबलपुर। सूर्योदय की किरणों के साथ टूटते सन्नाटे के बीच संगीममय भक्ति की धुन और श्वेत वस्त्रधारी पुरुष और पीताम्बरधारी मातृशक्ति। हाथों में आस्था के साथ सजी पूजन की थाली और शांतिधारा, अभिषेक के लिए उत्सुक श्रावक। चेहरे पर आध्यात्मिक भाव और मंगल प्रवचन से धर्म ज्ञान को आत्मसात करने की जिज्ञासाएं। अवसर था पर्युषण पर्व के पहले दिन शनिवार को दिगम्बर जैन मंदिरों में आयोजित कार्यक्रमों का। आचार्यो-मुनिवरों के सान्निध्य में श्रावकों ने उत्तम क्षमा धर्म की साधना की। आइये इसी मौके पर हम आपको आचार्य विद्यासागर महारज से जुडी रोचक कहानी कि वे कैसे साधारण बालक से आचार्य बने।