#mptourism नहीं जानते होंगे पिसनहारी की मढ़िया का ये रहस्य

महिला चक्की से आटा पीसा करती थी। जिनसे मिले पैसों से उसने इस मंदिर की नींव रखी

जबलपुर। दिगम्बर जैन पंथ का जाना-माना तीर्थ स्थल पिसनहारी की मढि़या। यह स्थान सिर्फ तीर्थ स्थल की दृष्टि से शानदार नहीं, बल्कि पर्यटन की अमूल्य धरोहरों में से भी एक में शुमार हो चुका है। अपने वास्तुशिल्प और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध यह स्थान करीब 500 सालों से अधिक पुराना है। पिछले कुछ समय से देखा जाए तो पर्यटन स्थलों में यह सबसे ज्यादा घूमा जाने वाले स्थल साबित हुआ है।


एक गरीब महिला ने किया था निर्माण
पौराणिक कथाओं और परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक गरीब महिला द्वारा किया गया था। इसका निर्माण एक पवित्र जैन संन्यासी की वाणी सुनने के बाद किया गया था। कहते हैं उस संन्यासी की वाणी से ही उस गरीब महिला को विशाल मंदिर बनाने की प्रेरणा मिली। वो महिला चक्की से आटा पीसा करती थी। जिनसे मिले पैसों से उसने इस मंदिर की नींव रखी। उस महिला के समर्पण को प्रदर्शित करने के लिए चक्की के वे पत्थर आज भी उसी स्थान पर रखे हैं।

Heritage: Digambar Jain pilgrimage center of Pisan

पिसनहारी यानी आटा पिसने वाली
इस मंदिर का नाम उसी महिला की स्मृति में रखा गया था। पिसनहारी का मतलब, एेसा कोई जो चक्की में आटा पीसने का काम करता हो। चूकि वह महिला इसी मंदिर के प्रांगण में रहकर यही काम किया करती थी, जिसकी वजह से इसका नाम पड़ा।



बेहद खास है मंदिर
यह जमीन से तीन सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। सामाजिक कार्यकर्ता संजय चौधरी के अनुसार यह स्थान महाकौशल के दिगंबर जैनों द्वारा बेहद पवित्र माना जाता है। मंदिर तक जाने के लिए एक घुमावदार रास्ता है और पहाड़ी पर चढऩे के लिए 208 सीढि़यों से अधिक पर चढऩा पड़ता है।
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Lalit kostha Desk
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