13 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पिछले 800 सालों से बस्तर में आज भी विराजमान है जुड़वां गणेश, जानिए क्या है पीछे की कहानी

बस्तर के मंदिरों के शहर (City of Temples) में है जुड़वा गणेश (Twin ganesh), जो दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति मानी जाती है।
less than 1 minute read
Google source verification
पिछले 800 सालों से बस्तर में आज भी विराजमान है जुड़वां गणेश, जानिए क्या है पीछे की कहानी

पिछले 800 सालों से बस्तर में आज भी विराजमान है जुड़वां गणेश, जानिए क्या है पीछे की कहानी

जगदलपुर.दंतेवाड़ा जिले के जंगलों के बीच एक अनोखा गणेश मंदिर है। यहां विघ्नहर्ता का जुड़वां स्वरुप विराजित है। जी हां बारसूर इलाके में जुड़वां गणपति है। यहां बप्पा की एक जैसी 2 मूर्तियां है। फर्क बस इतना है कि एक बड़ी तो दूसरी छोटी है। इन मूर्तियों की खासियत ये है कि यह दोनों ही मोनोलिथिक है। लोगों की मान्यताएं है कि यहां आकर दर्शन करने वालों के कष्ट विघ्नहर्ता हर लेते है।

Read More : Ganesh Chaturthi 2019: बस्तर चो राजा भक्तों के साथ होंगे ऑनलाइन, फेसबुक, यू ट्यूब पर होगा लाइव शो

बालू के पत्थरों से निर्मित है ये प्रतिमाएं
ये दोनों मूर्तियां मोनोलिथिक हैं। यानि कि एक चट्टान को बिना काटें छांटे और बिना जोड़े-तोड़े बनाई गई मूर्तियां। इन मूर्तियों को गढऩे में कलाकार ने गजब कलाकारी दिखाई है। जहां एक मूर्ति में लड्डू छुपा के या संभाल के रखे गए है तो वही दूसरी मूर्ति में बप्पा इन लड्डुओं का भोग लगा चुके है। कलाकार ने एक ही पत्थर में 2 अलग-अलग भाव दर्शा दिए है। ये दोनों मूर्तियां बालू यानि रेत के चट्टानों से बनी हुई है।

राजा ने अपनी बेटी के लिए बनवाया था।