सैलरी स्कैम : नए और पुराने बीईओ ने खेला ऐसा खेल, सरकार को लग गई लाखों की चपत

सैलरी स्कैम : नए और पुराने बीईओ ने खेला ऐसा खेल, सरकार को लग गई लाखों की चपत

Badal Dewangan | Publish: Jul, 14 2019 12:32:16 PM (IST) Jagdalpur, Jagdalpur, Chhattisgarh, India

तोकापाल के बीईओ दफ्तर (BEO Office) में दो साल से चल रहा था सैलरी स्कैम (Salary Scam), डिमोशन (Demotion) आदेश ताक पर रख तोकापाल के बीईओ दो साल तक 23 शिक्षकों (Teacher) में बांटते रहे बढ़ा हुआ वेतन

 

जगदलपुर. तोकापाल बीईओ दफ्तर में दो साल तक सैलरी के नाम पर स्कैम होता रहा और अब जब पत्रिका ने मामले में खुलासा किया है तो पूर्व और वर्तमान बीईओ मामले में खुद को बेकसुर बता रहे हैं। मामले में तत्कालीन बीईओ राजेश उपाध्याय और वर्तमान बीईओ रमाकांत पांडेय ने मामले में शासन को 66 लाख 24 हजार रुपए की चपत लगाई है। ऐसे शिक्षक जो बढ़ी हुई सैलरी की पात्रता नहीं रखते थे उन्हें भी प्रमोशन के आधार पर सैलरी बांटी गई, वो भी एक दो महीने नहीं बल्कि पूरे दो साल तक। तोकापाल बीईओ दफ्तर के सूत्रों की मानें तो राजेश उपाध्याय ने बढ़ा हुआ वेतन देना 2018 में शुरू किया। इससे पहले उन्होंने 201 से 30 का एरियस भी शिक्षकों के खाते में डाल दिया। गौरतलब है कि दो साल पहले जिला पंचायत के सीईओ प्रभात मलिक ने उन 211 शिक्षक पंचायत का डिमोशन कर दिया था जो अंग्रेजी विषय में अर्हता नहीं रखते थे।

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हाई कोर्ट के निर्देश पर दिया था
उस वक्त 543 शिक्षकों का प्रमोशन हुआ था, जिनमें 211 अपनी अर्हता साबित नहीं कर पाए और उनका डिमोशन हुआ। अर्हता साबित करने के लिए सभी शिक्षक पंचायत को जून 2019 तक का वक्त सीईओ ने हाई कोर्ट के निर्देश पर दिया था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान यानी डेढ़ वर्ष की अवधि में 211 शिक्षकों का प्रमोशन रोका गया था, सभी बीईओ से संबंधित शिक्षकों को बढ़ा हुआ वेतन नहीं देने और उन्हें पूर्व के पद पर यथावत रखने के लिए कहा गया था लेकिन जिले के 7 ब्लॉक में से तोकापाल ब्लॉक ही ऐसा था जहां सीईओ के आदेश को ताक पर रखकर शिक्षकों को प्रमोशन के आधार पर वेतन दिया जाता रहा

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वेतन का बंदरबांट होता रहा और किसी को पता नहीं
मामले में तत्कालीन से वर्तमान बीईओ तक वेतन का बंदरबांट करते रहे और उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी ही नही मिली। दोनों ही अफसर अपने वेतन आहरण अधिकारी का बेजा फायदा उठाते रहे और शासन को आधा करोड़ से ज्यादा का चूना लगा दिया। इस अनियमितता की जब पत्रिका ने पड़ताल की तो मालूम चला कि तोकापाल के तत्कालीन बीईओ राजेश उपाध्याय के वक्त से प्रमोशन के आधार पर वेतन दिया जा रहा है। उनके बाद आए नए बीईओ रमाकांत पांडे के कार्यकाल में भी यह सिलसिला ६ महीने तक जारी रहा। ऐसे में दोनों ही अफसरों की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में नजर आती है। मामले में दोनों ही बराबरी के भागीदार नजर आ रहे हैं।

अफसरों की गलती का खामियाजा हम क्यों भुगतें
जिन 211 शिक्षकों का डिमोशन किया गया है, उनमें से 23 शिक्षक तोकापाल के हैं। इन शिक्षकों ने पत्रिका से बातचीत करते हुए अपना पक्ष रखा और कहा कि अफसरों ने जो गलती की है, उसका खामियाजा आखिर हम क्यों भुगतें। हम तो चाहते हैं कि बाकी के ब्लॉक के शिक्षकों को भी हमारी तरह बढ़ी हुई सैलरी दी जाए। शिक्षक सुधीर दुबे और सौरभ देवांगन ने कहा कि नियम अनुसार ही उन्हें वेेतन दिया गया है। अगर इसमें कहीं भी कोई गड़बड़ी की गई है तो हम जिम्मेदार नहीं हैं।

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