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जोधपुर. पिाकिस्तान से हर रोज देश में ढाई करोड़ टिड्डियां प्रवेश कर रही हैं। टिड्डी अब गंगा के किनारे पहुंच गई हैं। उत्तरप्रदेश के वाराणसी में टिड्डी पहुंचने के बाद सरकार के ललाट पर चिंता की लकीरें खिंच गई। वर्ष 1962 के बाद यह पहला मौका है जब टिड्डी गंगा तट तक गई है। प्रयागराज के अलावा चित्रकूट और जौनपुर में भी टिड्डी ने उत्पात मचाया।
पिछले 55 दिन में पाकिस्तान से 55 टिड्डी दल भारत में घुसे हैं। औसतन टिड्डी दल का आकार तीन किलोमीटर लंबा और 1 किलोमीटर चौड़ा है। प्रत्येक दल के साथ 2 से 2.50 करोड़ टिड्डी आ रही है। 55वां टिड्डी दल 24 जून को बाड़मेर के रास्ते घुसा था। एक सप्ताह में तीन बड़े टिड्डी दल आ चुके हैं। बाड़मेर से पहले श्रीगंगानगर और फिर बीकानेर से घुसा था यानी राजस्थान की श्रीगंगानगर से लेकर जैसलमेर तक पूरा बॉर्डर टिड्डी प्रवेश के लिए अनुकूल बना हुआ है। मानसून की बरसात शुरू होने के साथ ही अब बड़े टिड्डी हमले बढ़ेंगे।
राजस्थान के साथ यूपी में ऑपरेशन टिड्डी
राजस्थान के अलावा शुक्रवार को उत्तरप्रदेश में टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम चलाया गया। जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, सीकर, नागौर, जयपुर, झुंझनूं के प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन किया गया। उत्तरप्रदेश में चित्रकूट, वाराणसी के राजपुर नाम स्थान पर टिड्डी पर पेस्टीसाइड स्प्रे किया गया। मानसून शुक्रवार को पूरे देश में छा गया और पश्चिमी हिस्से को पार करके पाकिस्तान में प्रवेश कर गया। मानसून के आने से अब टिड्डी के तेजी से प्रजनन की आशंका बढ़ गई है।
Published on:
27 Jun 2020 07:08 pm
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