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पहचानिए कौन है ये राजनेता? जिसने पिता से सीखी जादूगरी, आज भारतीय राजनीति का हैं बड़ा चेहरा

आप में से कितने लोग इस तस्वीर को पहचानते है?

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आप में से कितने लोग इस तस्वीर को पहचानते है। कुछ लोग इन्हें जानते भी होंगे तो कुछ लोगों के पास इनके बारे में कोई जानकारी नहीं होगी। देश के जाने-माने राजनेता और फिल्मी सितारों के बचपन की तस्वीरें देखना और उसे जानने की हर किसी को उत्सुकता होती है। यह तस्वीर भारतीय राजनीति के एक बड़े नेता के बचपन की है। आप भी जानते होंगे राजस्थान के तीन बार के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत, जिन्हें राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है।

अशोक गहलोत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनेता हैं। अशोक गहलोत राजस्थान के तीसरी बार मुख्यमंत्री रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार में कपड़ा मंत्री भी रहे हैं। जोधपुर में स्व. लक्ष्‍मण सिंह गहलोत के घर 3 मई 1951 को जन्‍मे अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्‍नातक डिग्री प्राप्‍त की और अर्थशास्‍त्र विषय लेकर एमए डिग्री प्राप्‍त की। गहलोत का विवाह 27 नवम्‍बर 1977 को सुनीता गहलोत के साथ हुआ।

गहलोत के बचपन के किस्सें…

राजनीति के जादूगर सीएम गहलोत के बचपन के मित्र रिखबचंद कोठारी ने बताया कि सीएम गहलोत का बचपन कैसा था। उन्होंने बताया कि अशोक गहलोत बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे। हर एक्टिविटी में भाग लेते थे। उन्हें न्यूज़पेपर पढ़ने का बहुत शौक था। खबरें पढ़कर स्कूल में दोस्तों को एक भाषण के रूप में सुनाते थे। बचपन से ही हर चीज सीखना और समझने की ललक उनमें बहुत ज्यादा थी। सीएम गहलोत के पिताजी बाबू लक्ष्मण सिंह गहलोत जादूगर थे। साथ ही नगरपालिका के चेयरमैन भी थे।

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बचपन से थे निडर

रिखबचंद कोठारी ने आगे बताया कि सीएम गहलोत और उनकी शुरुआती शिक्षा कच्ची क्लास से महामंदिर क्षेत्र के वर्धमान जैन स्कूल से शुरू हुई। इस स्कूल में हमने साथ-साथ पढ़ाई करके पांचवीं कक्षा पास की। इस स्कूल में पढ़ाई के दौरान हम तीन लोगों की खास दोस्ती हुआ करती थी। खेमसिंह परिहार, अशोक गहलोत में रिखबचंद कोठारी हमारे बचपन का एक किस्सा आज भी हमें याद है। हमारे मित्र खेमसिंह परिहार का फार्म हाउस हुआ करता था, फार्म हाउस के पास श्मशान घाट था।

पिता से सीखी जादूगरी

सभी दोस्त कई बार स्कूल के समय वहां से निकलकर फार्म हाउस पर मौज मस्ती करने निकल जाते थे। कई बार रात हो जाती तो उस श्मशान के रास्ते से निकलते थे। उस दौरान श्मशान में अंतिम संस्कार चल रहा होता था, तो दोस्त घबरा जाते थे, लेकिन अशोक गहलोत कभी नहीं घबराते थे। क्योंकि वह कहते थे कि मेरे पिताजी जादूगर हैं। हमारे घरों में तो खोपड़ी ऐसे ही पड़ी रहती है। धीरे-धीरे सीएम अशोक गहलोत ने अपने पिताजी से जादूगरी का हुनर भी सीख लिया था।

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