scriptChiranjeevi also sidelined, despite insurance, have to search for hospitals for treatment | चिरंजीवी से भी किनारा, बीमा के बावजूद इलाज के लिए तलाशने पड़ रहे अस्पताल | Patrika News

चिरंजीवी से भी किनारा, बीमा के बावजूद इलाज के लिए तलाशने पड़ रहे अस्पताल

locationजयपुरPublished: Dec 01, 2023 04:57:01 pm

Submitted by:

Vikas Jain

आरजीएचएस में दवा विक्रेताओं का एक ही जवाब....भुगतान ही नहीं मिल रहा
आज प्रकाशित खबर की ईपीएस लगा लें

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कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) ही नहीं चिरंजीवी बीमा योजना से भी कई निजी अस्पताल दूरी बना रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी ट्रांसप्लांट जैसे महंगे इलाज में आ रही है। दो-तीन लाख तक के खर्च में होने वाले जोड़ों के ट्रांसप्लांट के लिए भी चिन्हित अस्पताल मरीजों को इनकार कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि राजधानी में योजनाओं के जिम्मेदार अधिकारियों के दफ्तर होने के बावजूद मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। जबकि चिरंजीवी योजना में तो करीब 10 लाख से अधिक परिवार सालाना प्रीमियम भी जमा करवा रहे हैं।
मरीजों के मुताबिक चिरंजीवी के तहत पंजीकृत होने के बावजूद लाभ नहीं देने वालों में बड़े अस्पताल अधिक हैं। प्रदेश भर से पड़ताल में सामने आया कि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत कई जिलों में करोड़ों रुपए का भुगतान अटका है।
जिलों में ऐसे मिले हालात

डूंगरपुर : भुगतान नहीं होने से दिवाली से पहले से दवा देना बंद। पेंशनर समाज जिलाध्यक्ष जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंप कर जल्द ही मेडिकल स्टोर का बकाया भुगतान की मांग कर चुका।
अजमेर :दुकानों पर 30 फीसदी दवा नहीं मिल रही। दुकानों पर दवा उपलब्ध कराने वाली फर्म दवा आपूर्ति नहीं कर रही। अपना बाजार की दुकानों का करीब 4 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया। चिकित्सक की लिखी दवा में से 70 प्रतिशत ही मिल रही। कुछ कंपनी दवा की सप्लाई नहीं कर रही।
कोटा : कुछ दवा दुकानों पर या तो दवा नहीं मिल रही, मिल भी रही तो एक हजार रुपए से कम की। आए दिन दुकानों पर नोकझोंक। शहर में योजना से जुड़ी 150 दुकानों के करीब 30 करोड़ रुपए बकाया।
हनुमानगढ़ :भुगतान अटकने के कारण आरजीएचएस में इलाज के लिए मशक्कत। एक-एक मेडिकल स्टोर का करीब 20 से 25 लाख रुपए का भुगतान अटका
करौली : दवाइयां नहीं मिल रही। न तो अधिकृत मेडिकल स्टोर पर पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हैं और न ही केवीएसएस की ओर से संचालित दवा दुकान पर दवा मिल पा रही हैं। मेडिकल दुकानदारों को सरकार की ओर से भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके कारण परेशानी हो रही है। ऐसे में कई रोगियों को तो दवा बदलवानी पड़ रही है।

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