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हैरिटेज विलेज में नहीं पहुंचा स्वच्छ भारत मिशन अभियान !

हैरिटेज विलेज के दो किमी के मुख्य मार्ग में नहीं एक भी सार्वजनिक शौचालय,देशी-विदेशी पर्यटक भी होते हैं परेशान, महिलाओं को उठानी पड़ती है शर्मिंदगी

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जयपुर

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Vinod Sharma

Sep 22, 2017

Clean India Mission

चौमूं (जयपुर)। चौमूं के समीप करीब 1650 हैक्टेयर में खेत-खलिहान सहित बसी 12 हजार से ज्यादा की आबादी। देशी-विदेशी पर्यटकों का प्रमुख केन्द्र। 02 किलोमीटर के आसपास का मुख्य बाजार और 200 से अधिक दुकानें, लेकिन सार्वजनिक शौचालय एक भी नहीं। लगता है जैसे केन्द्र और राज्य सरकार के प्रयासों के बावजूद 'स्वच्छ भारत मिशन' यहां पहुंचा ही नहीं। ये वास्तविकता है चौमूं उपखंड के प्रमुख गांवों में शामिल सामोद की। राजधानी से मात्र 42 किलो दूर बसे इस गांव की यह स्थिति तो तब है जबकि इसे हैरिटेज विलेज का दर्जा भी मिला हुआ है। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस गांव के प्रमुख भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इतने विकास के बाद भी कोई शौचालय नहीं है। ऐसे में न केवल खरीदारी के लिए बाजार आने वाले स्थानीय लोगों को, बल्कि आसपास के गांवों के नियमित यात्रियों और कभी-कभी तो पर्यटकों को भी खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं और छात्राओं को गांव के भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इमरजेंसी होने पर दुकानों के पीछे दीवारों का सहारा लेते हुए शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है।

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चार प्रमुख बाजार से गुजरते है ग्रामीण
सामोद में गली-मोहल्लों के अलावा दो किलोमीटर के सड़क मार्ग पर मुख्य रूप से चार भीड़भाड़ वाले स्थान हैं। इनमें मैन चोपड़, बस स्टेंड, रानीवाला चौक और खिलारिया सर्किल शामिल हैं। इन चारों पर प्रतिदिन हजारों ग्रामीणों का आनाजान होता है। इनमें सरकारी कर्मचारी, दुकानदार, स्कूली छात्र-छात्राएं और अन्य लोग भी हैं। खिलारिया सर्किल के पास राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थित है। इसलिए यहां मरीजों और उनके परिजनों की भीड़भाड़ रहती है। साथ ही रानीवाला चौक के आसपास चार राजकीय सहित कई निजी विधालय भी चल रहे हैं। इसलिए सैकड़ों विधार्थी यहां से गुजरते हैं। इनमें छात्राएं भी हैं। इस दो किमी के मार्ग पर सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से इमरजेंसी होने पर मजबूरी में लोगों को खुले में शौच जाना पड़ जाता है।

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महिलाएं और छात्राएं होती हैं शर्मिंदा
बाजार की दुकानों के पीछे और इन बाजारों से निकलती गलियों में लोग यहां-वहां छुपते-छुपाते शौच के लिए बैठते हैं। खासकर ग्रामीण महिलाओं और कभी कभार छात्राओं को भी ये शर्मिंदगी उठानी पड़ जाती है। कभी-कभी तो महिलाओं को बाजार स्थित मकानों के दरवाजे खटखटाने पड़ जाते हैं। इतना सब होने के बावजूद यहां कभी किसी जनप्रतिनिधि और प्रशासन के जिम्मेदारों को सार्वजनिक शौचालय की जरूरत महसूस नहीं हुई।

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सैकड़ों यात्रियों, मरीजों और ग्राहकों की है आवाजाही
सामोद बस स्टैंड यहां का सबसे व्यस्त स्थान है। यहां आसपास के 8 से 10 गांवों के सैंकड़ों यात्रियों का प्रतिदिन आवागमन रहता है। सुविधा के नाम पर बस स्टैंड पर शौचालय, तो दूर यात्रियों के बैठने तक के लिए शेल्टर और कुर्सियां नहीं हैं। यात्री सड़क पड़े खड़े होकर बस, जीप आदि वाहनों का इंतजार करते हैं। यहीं पास ही पशु चिकित्सालय, दो बैंक कार्यालय, पोस्ट ऑफिस, सहकारी समिति सहित कई विभाग होने से बाहर के लोगों की नियमित आवाजाही होती रहती है। ऐसे में उन्हें शौच लग आए, तो भागकर खेतों में जाना पड़ता है।

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धार्मिक आस्था से जुडा है गांव
सामोद में प्रसिद्ध वीर हनुमान मंदिर और महामाया मंदिर में सालाना लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इसके चलते यहां सैलानियों और श्रद्धालुओं की रौनक बनी रहती है। इससे प्रशासन को राजस्व भी मिलता है, लेकिन बदले में सार्वजनिक सुलभ सुविधा भी नहीं मिल रही है। मंदिरों की ओर जाने वाले रास्तों में राहगीरों और श्रद्धालुओं को शौचालय नहीं मिलने से उनका मन भी खराब होता है।

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कई बार लिए जा चुके हैं प्रस्ताव
ऐसा नहीं है कि स्थानीय ग्राम पंचायत को यह स्थिति दिखाई नहीं देती, लेकिन वो इसे गंभीरता से नहीं ले रही। जानकारी के अनुसार बस स्टैंड और मैन मार्केट में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए पंचायत प्रशासन द्वारा प्रस्ताव तो कई बार लिए गए, मगर काम तक नहीं हुआ। इसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ रहा है।

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मैन मार्केट में बनी सुविधा को भी हटाया
ग्रामीणों ने बताया कि सामोद गांव स्थित मैन चौपड़ में कभी एक सार्वजनिक शौचालय हुआ करता था। इस एक मात्र टॉयलेट को भी पंचायत प्रशासन ने गौरव पथ निर्माण के दौरान हटा दिया। हालांकि मैन मार्केट में सुविधाओं से सुसज्जित सार्वजनिक शौचालय बनाने का आश्वासन सामोद सरपंच करते रहते हैं, लेकिन यह सच कब होगा, ये किसी को नहीं पता। इसे लेकर ग्रामीणों के साथ स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष व्याप्त है। फोटो: नीरज श्रीवास्तव (चौमूं)

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