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सरकार के फरमानों का विरोध हुआ,सराफ को घेरा, प्राचार्य सहित 200 मेडिकल टीचर्स ने दिए इस्तीफे

एसएमएस अस्पताल में बुधवार को एक तरफ तो मुख्यमंत्री का जन्मदिन मनाया जा रहा था, दूसरी तरफ सरकार के फरमानों से डॉक्टरों-कार्मिकों में उपजा असंतोष विरोध की राह से गुजरता हुआ आक्रोश के स्तर तक जा पहुंचा।

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Rajesh

Mar 09, 2017

saraf

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एसएमएस अस्पताल में बुधवार को एक तरफ तो मुख्यमंत्री का जन्मदिन मनाया जा रहा था, दूसरी तरफ सरकार के फरमानों से डॉक्टरों-कार्मिकों में उपजा असंतोष विरोध की राह से गुजरता हुआ आक्रोश के स्तर तक जा पहुंचा।

चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ को देखते ही संविदाकर्मी आक्रोशित हो उठे और उन्हें घेर लिया। उन्हें पुलिस सुरक्षा में बाहर निकलना पड़ा। अस्पताल में अफरा-तफरी सा माहौल बन गया।

इस बीच डॉक्टर भी इतने उद्वेलित हुए कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सहित करीब 200 सीनियर डॉक्टरों ने सरकार को इस्तीफे सौंप दिए।




संविदाकर्मी : ठेकेदार कर रहे शोषण

चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने एसएमएस अस्पताल पहुंचे तो संविदाकर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी मांगों को लेकर बुधवार को हड़ताल पर उतरे इन कर्मियों ने सराफ को घेर लिया। संविदाकर्मियों ने कहा कि ठेकेदार कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं।




सरकार से जो वेतन निर्धारित है, उसका आधा ही दे रहे हैं। कार्य के अनुसार वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब है। सरकार को चाहिए कि ठेका व्यवस्था खत्म करे, सीधे भर्ती करे। हालांकि सराफ ने आश्वस्त किया कि सीएम के समक्ष समस्या रखी जाएगी।






लैब टेक्नीशियन : निजी हाथों में नहीं जाने देंगे जांच लैब

लैब टेक्नीशियन ने भी बुधवार को अस्पताल में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इनका कहना था कि प्रदेश के जिला अस्पतालों की जांच लैबों को निजी हाथों में देना गलत है। यह कदम आम मरीजों को लूटने जैसा है।




संघ के महेश सैनी ने कहा कि इसके विरोध में गुरुवार को विधानसभा पर प्रदर्शन किया जाएगा। सरकार नहीं मानी तो प्रदेशस्तर पर आंदोलन तेज किया जाएगा।







परेशान हुए मरीज, आज भगवान भरोसे

विरोध प्रदर्शनों के बीच बुधवार को मरीज खासे परेशान हुए। अब गुरुवार से संविदाकर्मी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं, मेडिकल टीचर आपात सेवाओं के अलावा कोई काम नहीं करेंगे। ऐसे में मरीज सिर्फ रेजीडेंट डॉक्टर्स के भरोसे रहेंगे।




मेडिकल टीचर्स : सरकार कर रही तानाशाही

वरिष्ठ चिकित्सकों ने काम बंद कर अस्पताल के मुख्य द्वारा पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। फिर विधानसभा जाने का निर्णय किया गया लेकिन बाद में चिकित्सक स्टैचू सर्किल से लौट आए।




इन डॉक्टरों का कहना था कि सेवारत डॉक्टर्स को मेडिकल टीचर्स के समतुल्य करने का एक दिन पहले ही सरकार ने आदेश दिया है। सरकार ने उन लोगों को एसोसिएट असिस्टेंस प्रोफेसर एवं प्रोफेसर बनाने के आदेश दिए हैं, जो इसके योग्य ही नहीं हैं।




जो लोग मेहनत करके आए, उनकी सुध नहीं ली जा रही। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के जयपुर शाखा सचिव डॉ. धनंजय अग्रवाल ने कहा कि सरकार के ये आदेश तानाशाही दर्शाते हैं। इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट ही आएगी। इसके विरोध में गुरुवार सुबह एसएमएस अस्पताल के गेट पर मीटिंग होगी। डॉक्टर आपात सेवाओं के अलावा कोई काम नहीं करेंगे।





इधर, सेवारत चिकित्सक संघ के डॉ. जगदीश मोदी ने कहा कि सरकार ने विशेषज्ञ सेवारत डॉक्टर्स को मेडिकल टीचर का दर्जा दिया है, जो गलत नहीं है। कुछ राज्यों में ऐसा किया भी गया है।






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