
जयपुर।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने कहा कि भाजपा-कांग्रेस सिर्फ सत्ता के लिए भाग रही हैं। उन्हें समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। एक बार फिर दोनों पार्टियों के खिलाफ गठबंधन का प्रयास किया जाएगा। बेनीवाल ने शनिवार को यहां पत्रकारों को लोकसभा चुनाव में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारी की समस्या को बड़ा मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सदन में किसानों से मूंग खरीद की घोषणा की थी। एक महीने बाद भी घोषणा पूरी नहीं हुई। संविदाकर्मियों के स्थायी करने का वादा भी अधूरा रह गया। आतंकवाद को समाप्त करने का सेना ने प्रयास किया, लेकिन सरकार कूटनीतिक स्तर पर आतंक रोकने में विफल रही। राम मंदिर, कश्मीर में धारा 370 जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार ने पांच साल चुप्पी साधे रखी। वहीं दाउद इब्राहिम, नीरव मोदी, मसूद अजहर जैसे लोगों को पकडऩे में सरकार विफल रही है।
इस दौरान मेडता से विधायक इंदिरा देवी बावरी, भोपालगढ़ विधायक पुखराज गर्ग समेत कई अन्य मौजूद रहे।
लोकसभा में ताकत दिखाने की तैयारी में रालोपा
विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनाव में भी हनुमान बेनीवाल अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं। बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) ने प्रदेश में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी को खासतौर पर पश्चिमी और मध्य राजस्थान में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है।हालांकि अभी तक रालोपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। रालोपा के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लडऩे की बात कह रहे हैं।
इन सीटों पर अधिक उम्मीद
विधानसभा चुनाव में रालोपा ने नागौर जिले में दो सीट हासिल की है। इनमें खींवसर से खुद हनुमान बेनीवाल तो मेड़ता से इंदिरा देवी विधायक चुनी गई। इसके अलावा जोधपुर जिले के भोपालगढ़ में पुखराज चुनाव जीत चुके हैं। जबकि बाड़मेर और जैसलमेर में भाजपा को हरवाने में रालोपा की अहम भूमिका रही। ऐसे में नागौर और बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से रालोपा उम्मीद लगाए बैठी है।
नागौर से पिछला लोकसभा चुनाव बेनीवाल खुद लड़ चुके हैं। जब उन्हें डेढ़ लाख से अधिक वोट मिले थे। बेनीवाल इस बार भी जाट, पिछड़े, दलित और मुस्लिम वर्ग के साथ युवाओं को साधकर आगे बढऩे की कोशिश कर रहे हैं।
विधानसभा में गठबंधन का हुआ बुरा हश्र
विधानसभा चुनाव में बेनीवाल ने घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी से गठबंधन किया था। हालांकि यह गठबंधन नाम का ही साबित हो कर रह गया था। इसकी वजह गठबंधन वाली सीटों पर दोनों ही दलों के उम्मीदवार खड़े होने से पैदा हुई थी। वहीं भारत वाहिनी के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।
Published on:
17 Mar 2019 08:48 am
