जयपुर में घूमने के लिए भी चुकाना पड़ रहा टोल, कंपनियों की तिजोरी भर रही सरकार

प्रदेश में बेहतर सड़क-सुविधाएं देने के नाम पर शुरू किया गया टोल टैक्स वाहन चालकों की जेब से धन चूसने वाली मकड़ी बन गया है।

By: santosh

Published: 22 Aug 2017, 08:32 AM IST

जयपुर। प्रदेश में बेहतर सड़क-सुविधाएं देने के नाम पर शुरू किया गया टोल टैक्स वाहन चालकों की जेब से धन चूसने वाली मकड़ी बन गया है। इसका जाल दिनोंदिन कसता जा रहा है। खुद राजधानी की भी हालत यह है कि शहर से बाहर जाने के लिए ऐसी कोई मुख्य सड़क नहीं बची है, जहां यह मकड़ी आड़े नहीं आती। यहां तक कि अपने ही शहर में घूमने के लिए भी अब टोल देना होगा। रिंग रोड पर बनने वाले २ टोल शहरी और आबादी क्षेत्र में ही होंगे, जहां 2 जगह टोल लगेगा।

 

8 टोल प्लाजा ने चहुंओर से घेर रखा है शहर को
बीओटी व पीपीपी के नाम पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), सार्वजनिक निर्माण विभाग व आरएसआरीडीसी की ओर से टोल का जाल लगातार फैलाया जा रहा है। ऐसा सुविधा देने के नाम पर किया जा रहा है। लोग वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने के अपने अधिकारों की दुहाई देते रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। सरकार सिर्फ टोल कंपनियों की तिजोरी भरने में जुटी है। ऐसे में लोगों को शहर से बाहरी इलाके की तरफ कुछ दूर जाने के लिए भी टोल देना पड़ रहा है। हालात यह है कि 8 टोल प्लाजा ने शहर को चहुंओर से घेर रखा है। अजमेरी गेट से महज 24 किमी दूरी पर ही टोल है। घाट की गूणी टनल की दूरी तो बहुत कम है।

 

लोगों पर इसलिए भारी पड़ रहा यह बोझ
टोल रोड पर जहां टोल प्लाजा बनाए गए, वे स्थान आबादी क्षेत्र के पास हैं। इनमें से ज्यादातर तो जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के परिधि क्षेत्र में स्थित ही हैं। इन टोल प्लाजा के काफी आगे तक आवासीय योजनाएं सृजित हो चुकी हैं। विवाह स्थल, रिसोर्ट, होटल आदि इनके आगे तक बनाए जा चुके हैं। इस कारण वहां तक पहुंचने के लिए भी लोगों को टोल चुकाना पड़ रहा है जबकि लोगों का हक है कि ऐसी स्थिति में उन्हें वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

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