चुनावी वादों के जाल में गुम हुआ सांसों का सवाल, दलों-नेताओं का न तो ध्यान, न कोई प्लान

चुनावी वादों के जाल में गुम हुआ सांसों का सवाल, दलों-नेताओं का न तो ध्यान, न कोई प्लान

kamlesh sharma | Publish: Apr, 17 2019 07:02:50 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

राज्य में जयपुर सहित विभिन्न शहर वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं।

जयपुर। राज्य में जयपुर सहित विभिन्न शहर वायु प्रदूषण से जूझ रहे हैं। प्रदूषित वायु के रूप में लोगों की सांसों में लगातार 'जहर' घुल रहा है लेकिन राजनीतिक दलों और नेताओं का इस पर न तो ध्यान है, न ही उनके पास इस संबंध में कोई प्लान है। चुनावी वादों-घोषणाओं का जाल बहुत लम्बा है लेकिन सांसों का यह सवाल इस बार भी कहीं नजर नहीं आ रहा।


वायु प्रदूषण के लिहाज से जयपुर अति जोखिम क्षेत्र है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, अमरीकन थोरेसिक सोसायटी सहित चेस्ट, यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसायटी आदि ने हाल ही चेतावनियां भी जारी की थीं। इसके बावजूद किसी भी चुनाव में 'आबोहवाÓ को कोई भी दल या नेता मुद्दा नहीं मानता। लोगों की सेहत और सांसों से जुड़े इस विषय को चुनाव घोषणा पत्र में शामिल करना तो दूर, जिक्र तक नहीं करते।

जयपुर-जोधपुर की स्थिति बहुत खराब
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रदूषण का स्तर 2.5 माइक्रोन साइज पार्टिकल 20 से कम होना चाहिए जबकि जयपुर में यह 104 मिला था। यानी 5 गुना अधिक। पिछले साल मई में सामने आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित 15 शहरों में जयपुर और जोधपुर शामिल थे।

मौतों का बड़ा कारण
ऑनलाइन विजुलाइजेशन टूल्स ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2017 के अनुसार राजस्थान में प्रति 1 लाख लोगों में 112.05 मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं। यह संख्या अन्य राज्यों के मुकाबले सर्वाधिक है। वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के कारण 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में भी राजस्थान की स्थिति खराब है। हेल्थडाटा डॉट ओआरजी की वर्ष 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौतें राजस्थान में ही सर्वाधिक दर्ज हुईं। यहां 1 लाख के मुकाबले 143.71 बच्चों की मौत हुई।

ये कमियां बनी रहेंगी तब तक नहीं घटेगा वायु प्रदूषण
- राज्य में प्रदूषण मापी स्टेशन 10 ही हैं जबकि हर जिले में कम से कम एक स्टेशन होना चाहिए
- सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए नीति बने
- नो वीकल डे शुरू हों
- प्रति परिवार अधिकतम वाहनों की संख्या तय हो
- प्रति परिवार पेट्रोल-डीजल की खपत तय हो
- सड़कों पर धुआं छोडऩे वाले वाहन तत्काल सील किए जाएं
- सड़कों पर धुआं छोडऩे वाले सरकारी वाहन भी बंद किए जाएं
- सड़क किनारे अधिकाधिक हरित पट्टियां विकसित की जाएं

चिन्ताजनक इसलिए
हाल ही अमरीकन थोरेसिक सोसायटी, चेस्ट और यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसायटी ने चेतावनी जारी की थी। इसके अनुसार प्रदूषण का घोल सांसों को भारी तकलीफ देने वाली हाइपर सेंसेटिविटी पेन्यूमोनाइटिस बीमारी फैलाने का बड़ा कारण है। इसमें सांस फूलने और खांसी की समस्या बढ़ जाती है।

वह दिन दूर नहीं, जब रहना मुश्किल हो जाएगा
वायु प्रदूषण पर लंबे समय से काम कर रहे सवाई मानसिंह अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र सिंह के अनुसार वायु प्रदूषण आज का सबसे बड़ा मुद्दा है लेकिन इस पर कहीं भी बात नहीं हो रही। जबकि वैश्विक संस्थाएं भी राजस्थान के शहरों की स्थिति पर चिंता जता चुकी है। इसके कारण चिह्नित कर हल नहीं निकाला, समग्र नीति बनाई तो वह दिन दूर नहीं जब इन शहरों में रहना ही मुश्किल हो जाएगा।

रोजाना आ रहे 40 से 50 बच्चे
जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा की शिकायत लेकर हर महीने 10 से 12 बच्चे अस्पताल आ रहे हैं। सांस संबंधी परेशानी लेकर हर महीने 30 से 35 बच्चे भर्ती हो रहे हैं।

हम परिवहन विभाग के जरिए कोई नीति बनाने की कोशिश करेंगे ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो। जयपुर शहर के लिए विशेष नीति बनाने का प्रयास होगा। 
- प्रताप सिंह, शहर अध्यक्ष, कांग्रेस

जयपुर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विधानसभा में मामला उठाएंगे। जयपुर, जोधपुर जैसे शहरों के लिए नीति बनाने, सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाने पर काम करेंगे। 
- मोहनलाल गुप्ता, शहर अध्यक्ष, भाजपा

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