कोरोना संक्रमण फैला तो उठाए 7 कदम, मिली 94 फीसदी सफलता

Highlights
- जीतेंगे हम: कोटा संभाग में रिकवरी दर सौ प्रतिशत के करीब
- परिणाम सकारात्मक, कोटा जिले में काबू में आ रहा कोविड-19
- 60 हजार बच्चों को सुरक्षित घर भेजने में कामयाबी मिली

By: santosh

Updated: 26 Jun 2020, 09:22 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कोटा। देश में कोचिंग सिटी के नाम से ख्यात राजस्थान के कोटा में कुशल रणनीति से कोरोना संक्रमण के बिगड़े हालात पर काबू पा लिया है। रेड जोन से निकलकर जिला ग्रीन जोन की तरफ बढ़ रहा है। देश में संक्रमण तेजी से फैला तब कोटा में करीब 60 हजार कोचिंग विद्यार्थी थे। बेहतर इंतजामों से एक विद्यार्थी संक्रमित नहीं हुआ। सबको सुरक्षित घर पहुंचा दिया गया।

उनको भेजने के लिए 1100 बसों और 16 ट्रेनों का संचालन किया। सभी राज्यों से इन प्रयासों की सराहना हुई और कोटा की केयर सिटी के रूप में पहचान बनी। ये सब कोटा में उठाए गए सात कदमों से संभव हो पाया। पुलिस-प्रशासन के साथ कोटा का आमजन तक कहने लगा है, हम होंगे कामयाब।

शहर में अप्रेल के पहले सप्ताह में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया और लगातार हालात बिगड़ते गए। जिला प्रशासन ने संक्रमण रोकने में जो कदम उठाए, उसमें जनता का साथ मिला। कोरोना नियंत्रण के लिए जुटी टीम को सबसे पहले प्रशिक्षण दिया गया। फिर कोरोना नियंत्रण जोन में नमूने संग्रहण का कार्य तेजी से किया। नमूनों की संख्या बढ़ने से संक्रमण पर नियंत्रण होता गया।

ऐसे ढूंढा सफलता का मार्ग
सात कदमों में ट्रेनिंग, जन जागरूकता, क्वारंटीन, स्क्रीनिंग, सुरक्षित लॉजिस्टिक व्यवस्था, नमूना संग्रहण और कोरोना नियंत्रण क्षेत्र बनाना शामिल हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज के नियंत्रक डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि सिर्फ शहर नहीं, बल्कि कोटा संभाग में रिकवरी रेट 94 प्रतिशत तो जिले में 92 प्रतिशत तक आ गई है।

रोगियों के लिए विकसित की सुविधाएं
कोरोना पॉजिटिव रोगियों के उपचार के लिए शहर में दो कोविड समर्पित अस्पताल बनाए गए। मेडिकल कॉलेज के नवीन चिकित्सालय और सुपर स्पेशिएलिटी ब्लॉक को मिलाकर 754 बेड का अस्पताल बनाया। इसमें 108 आईसीयू बेड हैं। मंडल रेल चिकित्सालय को भी कोविड समर्पित अस्पताल बनाया गया। इनमें 104 बेड हैं। कोरोना संदिग्धों को क्वारंटीन करने के लिए निजी विश्वविद्यालय के भवन में 500 लोगों की सुविधा विकसित की।

ज्यादा जोखिम वालों पर विशेष ध्यान

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उच्च जोखिम और कमजोर तबके के लिए इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन पर जोर दिया जा रहा है। मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से कमजोर वर्ग में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले, हृदय या गुर्दे की बीमारी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या कमजोर प्रतिरक्षा वाले संदिग्ध रोगियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे व्यक्तियों को उनके कंटेनमेंट क्षेत्र से बाहर इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन की सुविधा प्रदान की गई है।

- जिले में मेडिकल टीम के साथ प्रशासनिक अमले ने कोरोना नियंत्रण के लिए प्रयास किए। लोगों को बचाव उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया। कोविड अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाईं। जागरूकता से कोरोना नियंत्रण की ओर बढ़ रहे हैं।
ओम कसेरा, जिला कलक्टर

- शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में क्वारंटीन व्यवस्था का बेहतर तरीके से पालन हआ। मेडिकल टीमों ने ऐसे सभी क्षेत्रों में जाकर कोविड के नमूने लिए जहां संक्रमित लोग सामने आए। नियंत्रण के लिए सात कदम उपयोगी रहे।
डॉ. भूपेन्द्र तंवर, सीएमएचओ

(डिस्क्लेमर : फेसबुक के साथ इस संयुक्त मुहिम में समाचार सामग्री, संपादन और प्रकाशन पर पत्रिका समूह का नियंत्रण है)

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