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JLF 2024 : सुधा मूर्ति ने कहा, जिंदगी भी हमें सरप्राइज देती है,बारिश संग सजी जिंदगानी की पाठशाला

locationजयपुरPublished: Feb 05, 2024 12:30:43 pm

Submitted by:

Ashish sharma

jaipur Literature Festival 2024 : चारबाग में आयोजित सेशन "कॉमन येट अनकॉमन स्पीकर" में सुधा मूर्ति ने बताया कि कैसे आप हर पल का आनंद ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिंदगी भी हमें अकसर दो तरह के सरप्राइज देती है। ऐसे में बच्चे भी उनकी एक झलक पाने को बेताब दिखे।

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सर्द सुबह और बारिश के बीच सुधा मूर्ति ने जब जिंदगानी की पाठशाला सजाई तो फिजां में गर्माहट घुल गई। हर कोई उन्हें सुनने को उत्साहित नजर आया। बच्चे उनकी झलक पाने के लिए बेताब दिखे। सेशन की शुरुआत में उन्होंने अपनी किताब 'कॉमन येट अनकॉमन' के कुछ पन्ने पढ़े और उसके बाद खुशी, रिश्ते, संयम और जीवन के कई रंगों पर प्रेरणादायी बातें कहीं।

जिंदगी दो तरह के सरप्राइज देती है

JLF 2024 सेशन में सुधा मूर्ति ने कहा कि आपके अंदर खुशी होनी चाहिए। हर पल का आनन्द लेना चाहिए। क्या पता कल हो न हो। जिन्दगी हमेशा सरप्राइज देती रहती है, वो सरप्राइज अच्छे और खराब दोनों में से कुछ भी हो सकते हैं। ऐसे में खुद से खुशी खोजनी चाहिए। कोई दूसरा आपको खुश नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मैं बचपन से ही जिज्ञासु रही हूं। मेरे लिए व्यक्ति एक किताब की तरह है, जब भी किसी से बात करती हूं तो लगता है कि मैं किताब पढ़ रही हूं।

उन्होंने कहा कि जब आप बच्चे होते हैं, तो सब चीज बेहद कलरफुल नजर आती है। ऐसे में हमेशा सकारात्मक रहने के लिए खुद में बच्चे को जिंदा रखना होगा।

आम लोग सिखाते हैं जीवन की खास बातें

छोटे कस्बों में बचपन बिताने से काफी कुछ सीखने को मिला है। सब एक दूसरे को जानते हैं। स्मॉल टाउन हमें एडजस्टमेंट सिखाता है, आम लोगों से हम बहुत बड़ी—बड़ी बातें सीख लेते हैं। किताब के बारे में उन्होंने कहा कि यह मोतियों की माला है, जिसमें रोजमर्रा का आम जीवन बसता है। वे यह भी कहती हैं कि आज का समय बिल्कुल अलग है। आज लोगों के पास बात करने का समय ही नहीं हैं, भले ही दूसरी तरफ वे व्हाट्सऐप पर व्यस्त रहते हैंं।

जीवन में क्यों जरूरी है संयम

मेरे लिए संयम ही प्यार है। जब किसी भी रिलेशनशिप में संयम कम होने लगता है, तो आपसी मतभेद शुरू हो जाते हैं। कभी भी पत्नी और पति एक दूसरे के अपोजिट नहीं हो सकते हैं, उन्हें एक दूसरे का पूरक होना होगा। सुधा कभी नारायण मूर्ति नहीं बन सकती, नारायण मूर्ति कभी सुधा नहीं बन सकते। दोनों की अपनी लाइफ है, जीने का तरीका है। लेकिन सबसे जरूरी है कि दोनों के बीच की समझ हमेशा बनी रहे।

राइटिंग में इमोशंस और डिसिप्लेन

मेरी राइटिंग मेरे इमोशंस हैं। मुझे लगता है राइटिंग में डिसिप्लेन होना चाहिए। किसी भी नॉवल को लिखने से पहले दो से तीन साल तक उसके लिए तैयारी करती हूं। रिसर्च करती हूं। लिखने के लिए पढ़ना बहुत जरूरी है, ज्यादा से ज्यादा बुक्स पढ़िए। कभी भी किसी का कॉपी मत करिए।


आज वुमन इंजीनियर्स को देखकर अच्छा लगता है

पढ़ाई के दौरान इंजीनियरिंग चुनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि शुरुआत में मेरे परिवार को काफी कुछ सुनना पड़ा। लोग कहते थे कि महिलाएं इंजीनियरिंग नहीं कर सकती। इंजीनियर से कौन शादी करेगा। जब मैं टाटा में काम करती थी, तब अकेली महिला थी। लेकिन आज वहां 8 हजार से ज्यादा महिला एम्प्लॉइज को देखकर अच्छा लगता है।



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सुधा मूर्ति की कुछ खास बातें


— हर किसी को वैसा जीवन जीना चाहिए, जैसा वो वाकई में जीना चाहते हैं।
— प्रकृति ने महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा स्मार्ट बनाया है।
— मुझे अफसोस है कि मैंने स्वीमिंग, योगा और स्पोट्र्स नहीं सीखा। पहले लड़कियों को स्पोट्र्स खेलना अलाउ ही नहीं था।
— लोग तो कुछ भी कहेंगे लोगों का काम है कहना
— आप खुद ही खुद के अच्छे दोस्त और दुश्मन हो सकते हैं। कोई दूसरा आपके के लिए कुछ नहीं कर सकता।

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