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जयपुर

बिना दिशा-निर्देश नहीं बिकेगी कोरोना की कोई दवा

योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी की ओर से सात दिन में कोरोना मरीजों के उपचार के दावे के साथ उतारी गई दवा को राजस्थान सरकार ने खास तवज्जो नहीं देते हुए साफ कहा है कि बिना दिशा-निर्देशों के कोई भी दवा प्रदेश में बेची गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

जयपुरJun 25, 2020 / 12:32 am

Chandra Shekhar Pareek

आयुष मंत्रालय की स्वीकृति जरूरी
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा आयुष मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा है कि भारत सरकार की ओर से ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 एवं 1945 के तहत 21 अप्रेल, 2020 को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार केन्द्रीय आयुष मंत्रालय की स्वीकृति के बिना कोविड-19 महामारी की दवा के रूप में किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का विक्रय नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के उपचार की दवा के रूप में किसी भी औषधि का विक्रय पाए जाने पर विके्रता के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उपयोगी
डॉ. शर्मा ने बाबा रामदेव की ओर से कोरोना-19 के उपचार की दवा के दावे के संबंध में स्पष्ट किया कि आयुर्वेदिक औषधियां इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में उपयोगी हो सकती हैं लेकिन दवा के रूप में यह दावा बिना आयुष मंत्रालय की अनुमति के स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दवा के संबंध में न तो किसी ने राज्य सरकार को आवेदन किया और न ही राज्य सरकार ने इस बारे में कोई अनुमति दी है।
बिना अनुमति नहीं हो सकता ट्रायल
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के अनुमति के बिना ह्युमन ट्रायल भी नहीं किया जा सकता। बिना अनुमति के क्लिनिकल ट्रायल करके आमजन को गुमराह करने वाले के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल, 2020 को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार कोविड-19 के संदर्भ में किसी भी संगठन को अनुसंधान करते समय साइन्टिफिक एडवाइजरी बॉडीज एवं इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी की ओर से अनुमोदित होना चाहिए।
अत्यंत कड़े हैं नियम व प्रावधान
उन्होंने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल परियोजना सीटीआरआई की ओर से पंजीकृत होने के साथ ही उनका सैम्पल साईज भी पर्याप्त हो, क्लिनिकल ट्रायल आयुष अथवा आईसीएमआर के दिशा निर्देशों के अनुसार हो तथा बायो मेडिकल एवं हैल्थ रिसर्च के नियमों की अनुपालना के साथ हो। आईसीएमआर द्वारा प्रकाशित नेशनल एथिकल गाइड लाइन्स के अनुसार मानव भागीदारी हो तथा इसमें पंजीकृत आयुष चिकित्सकों की सहभागिता के साथ ही अन्य सभी दिशा निर्देशों की पालना किया जाना आवश्यक है।

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