कोरोना ने अटकाए क्लोरीन डाई आॅक्साइड प्लांट

टेक्निकल कमेटी ने चार महीने पहले दी स्वीकृति
पीएचईडी सिटी सर्कल के साउथ प्रथम व सैकंड में लगेंगे वाटर फिल्टर प्लांट
विभाग ने दो साल तक किया वाटर फिल्टराइजेशन परीक्षण
अब शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
प्लांट लगाने में खर्च होंगे करीब 90 लाख रुपए

By: anand yadav

Published: 26 Jun 2020, 11:35 AM IST

जयपुर। कोरोना वायरस ने जयपुर शहर में सरकारी जलापूर्ति के पानी को फिल्टर करने के लिए लगाए जाने वाले क्लोरीन डायआॅक्साइड प्लांट की प्रक्रिया को अटका दिया। बीते तीन महीने से अटकी प्लांट लगाने की टेंडर प्रक्रिया विभाग अब शुरू कर रहा है और जुलाई माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शहर में विभाग के सिटी सर्कल साउथ के प्रथम और सैंकड में प्लांट लगाने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

यह है मामला

गौरतलब है कि जलदाय विभाग पंप हाउसों में अब तक ब्लीचिंग पाउडर के उपयोग से जल शुद्धिकरण कर रहा है। इसके अलावा शहर में दस पंप हाउसों में इलेक्ट्रो क्लोरीनेटर प्लांट से भी जल शुद्धिकरण किया जा रहा है लेकिन अब इनमे से अधिकांश प्लांट बंद हो चुके हैं। प्लांट चलाने वाली निजी फर्म ने भी इनकी मेंटीनेंस से पल्ला झाड़ लिया है। वहीं विभाग ने जल शुद्धिकरण के लिए क्लोरीन डायआॅक्साइड तकनीक के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। चार महीने पहले विभाग की टेक्निकल कमेटी ने जलदाय विभाग सिटी सर्कल साउथ फर्स्ट और सैकंड डिवीजन के दो दो पंप हाउसों का चयन भी कर लिया लेकिन कोरोना वायरस के चलते कलोरीन डायआक्साइड प्लांट लगाने का मामला अधरझूल में लटक गया।

टेक्निकल कमेटी ने किया एप्रूव

मालूम हो विभाग 2015—16 में प्रतापनगर पंप हाउस में लगे प्लांट में क्लोरीन डायआक्साइड से जल शुद्धिकरण का सफल परीक्षण भी कर चुका है। विभाग फिलहाल जल शुद्धिकरण के लिए ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग कर रहा है लेकिन ब्लीचिंग पाउडर विस्फोटक होने व उसमें हानिकारक तत्व होने के कारण जलदाय अफसरों ने शहर में क्लोरीन डाय आक्साइड प्लांट के उपयोग पर सहमति जताई है।

इलेक्ट्रो क्लोरीनेटर प्लांट का विकल्प
शहर में लगे दस इलेक्ट्रोक्लोरीनेटर प्लांट से भी विभाग जल शुद्धिकरण कर रहा है लेकिन प्लांट में लगे इलेक्ट्रोड्स व डायोड सर्किट की लाइन पांच से सात साल तक होने के कारण प्लांट ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सके हैं। ऐसे में विभाग अब इलेक्ट्रो क्लोरीनेटर प्लांट की जगह क्लोरीन डाय आक्साइड प्लांट को ज्यादा कारगर मान रहा है। हालांकि जलदाय अधिकारियों ने पेयजल वितरण वाले बड़े पंप हाउसों में फिलहाल ब्लीचिंग पाउडर का ही उपयोग जारी रखने की बात कही है।

टेंडर डाक्यूमेंट तैयार,टेंडर प्रक्रिया जल्द

जलदाय विभाग सिटी सर्कल साउथ एसई सतीश जैन के अनुसार करीब 90 लाख रुपए लागत वाले चार प्लांट जयपुर शहर में लगाने की कवायद चल रही है। परीक्षण पूरा हो चुका है और सकारात्मक परिणाम आने के बाद सिटी सर्कल साउथ के दो डिवीजन क्षेत्र के दो दो पंप हाउसों में क्लोरीन डायआक्साइड प्लांट लगाने टेंडर डाक्यूमेंट तैयार हो गए हैं। शुक्रवार को संबंधित अधिकारियों को चर्चा के लिए बुलाया है। जुलाई में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

anand yadav Desk
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