पहले विश्व युद्ध में धनूरी के छह और दूसरे विश्व युद्ध में चार जवान देश के लिए शहीद हुए थे। आजादी के बाद भी इस गांव से सात जवान शहीद हो चुके हैं। सन 1962 भारत-चीन के युद्ध में गांव के मोहम्मद इलियास खां, मोहम्मद सफी खां और निजामुद्दीन खां ने देश सेवा के लिए लड़ते-लड़ते अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।