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राजस्थान के सबसे बड़े SMS अस्पताल की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’, सामने आई हैरान करने वाली सच्चाई

Sawai Mansingh Hospital: सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने के लिए बीते दो दशक के दौरान बने करीब आधा दर्जन प्लान पूरी तरह फेल हो गए।

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jaipur News: सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने के लिए बीते दो दशक के दौरान बने करीब आधा दर्जन प्लान पूरी तरह फेल हो गए। सीकर रोड पर बनाए ट्रोमा सेंटर को तत्कालीन सरकार ने निजी अस्पताल को सुपुर्द कर दिया तो मानसरोवर में निजी जनसहभागिता से अस्पताल चलाने से आमजन की उम्मीदें धूमिल हो गईं।

प्रताप नगर में एक दशक पहले नया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाकर सरकार ने चलाने की कोशिश की लेकिन आज तक वह भी सवाईमानसिंह अस्पताल का मजबूत विकल्प नहीं बन पाया। एसएमएस के नजदीक जयपुरिया अस्पताल से लोगों को आस थी लेकिन वहां भी आए दिन मरीजों को एसएमएस ही रैफर किया जा रहा है।

अब राज्य सरकार जयपुर शहर की चारों दिशाओं में नए सैटेलाइट अस्पताल बनाने की तैयारी कर रही है। जिनके लिए जेडीए ने जमीन भी आवंटित कर दी है। हालांकि अभी शहर के बीच में मोतीडूंगरी और किशनपोल सैटेलाइट अस्पताल भी विकसित नहीं हो पाए। ऐसे में पर्याप्त संसाधनों, मैनपावर के बिना नए अस्पताल भी लोगों के लिए फायदेमंद होने की संभावना कम बताई जा रही है।


इसलिए नहीं बन रहा मजबूत विकल्प

डॉक्टर नहीं छोड़ना चाहते एसएमएस, नए मैनपावर की कमी
नए अस्पतालों में समग्र जांच व अन्य सुविधाओं का अभाव
मरीजों को आते ही एसएमएस रैफर करने की प्रवृत्ति
एसएमएस के अलावा अन्य जगहों पर सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं की कमी

40 फीसदी मरीज अकेले एसएमएस में
राजधानी में 12 बड़े सरकारी अस्पताल हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सवाईमानसिंह अस्पताल, जेकेलोन, जनाना, महिला, गणगौरी, कांवटिया, बनीपार्क, सेठी कॉलोनी, मनोरोग और टीबी अस्पताल में रोजाना करीब 30 हजार मरीज प्रतिदिन आउटडोर में आ रहे हैं। इनमें से करीब 40 फीसदी अकेले एसएमएस के हैं। आरयूएचएस और जयपुरिया अस्पताल में राजधानी के कुल मरीज भार के 10 फीसदी मरीज भी नहीं पहुंच रहे। राज्य सरकार के अधीन इन सभी अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ का मरीजों की तुलना में अभाव है। जयपुरिया, गणगौरी और आरयूएचएस को तो एसएमएस के विकल्प के तौर पर देखा गया, लेकिन यहां से जुड़ीं उम्मीदें भी आज तक पूरी नहीं हो पाईं।

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मजबूरी बन चुका है एसएमएस आना
राजधानी में बीते डेढ़ दशक के दौरान निजी व सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विकास हुआ है, लेकिन इसके बाद भी कोई भी अस्पताल एसएमएस का संपूर्ण विकल्प नहीं बन पाया। इसका मुख्य कारण सरकार के पास डॉक्टरों की कमी रही। सरकार ने एसएमएस का मजबूत विकल्प बनाने के लिए कांवटिया, बनीपार्क और सेठी कॉलोनी अस्पताल को एसएमएस से संबद्ध भी किया। लेकिन आज भी मरीजों को कई बीमारियों का इलाज कराने के लिए एसएमएस ही आना पड़ रहा है।

मरीजों का विश्वास
यह सही है कि आज भी मरीजों का एसएमएस पर अधिक विश्वास है। अन्य अस्पतालों में भी धीरे-धीरे सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं मजबूत होंगी तो एसएमएस पर से मरीजों का दबाव कम होगा।
- डॉ.अचल शर्मा, अधीक्षक, सवाईमानसिंह अस्पताल