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लॉक डाउन में महिलाओं की मुसीबत, सखी सेंटर में कॉउसलिंग बंद, नहीं दिया जा रहा आश्रय

Corona lock down: जबकि विभाग का निर्देश आफत में फंसी महिलाओं को, मेडिकल जांच के बाद आश्रय दिया जाए - पत्रिका ने की पड़ताल तो तुरंत जारी किया ड्यूटी चार्ट

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जयपुर

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Deepshikha

Mar 31, 2020

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सरिता दुबे/ रायपुर। छत्तीसगढ़ के 27 सखी सेंटर में इन दिनों महिलाओं को मदद नहीं मिल रही है यहां तक कि सारे सेंटर्स में काउंसिलिंग भी बंद कर दी गई है। कई सेंटस तो फोन भी नहीं उठा रहे है, जबकि महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा सारे राज्य के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और विभागों के सचिवों को यह निर्देश जारी किया गया है कि हर हाल में आफत में फंसी महिलाओं को आश्रय दिया जाए और इन हालातों में भी सारी प्रक्रियाएं यथावत जारी रखी जाए।

इसके लिए मंत्रायल से जिला कलेक्टर को सारी व्यवस्था करने को कहा गया है लेकिन कोई व्यवस्था सखी सेंटर में नजर नहीं आ रही है। गौरतलब है कि रायपुर में देश का पहला सखी सेंटर खोला गया था। लेकिन रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के सखी सेंटर में भी महिालओं की कोई मदद नहीं की जा रही है। इतना ही नहीं रायपुर सेंटर में तो रात में पुरूष की ड्यूटी लगाई गई है, जिससे महिलाएं असहज महसूस करती हैं।

पत्रिका ने पड़ताल की तो बना ड्यूटी चार्ट

सखी सेंटर की इन अनियमितताओं के बारे में पत्रिका ने जब सेंटर पर जाकर पड़ताल की तो वहां महिला की जगह दो लड़के ड्यूटी कर रहे थे। सेंटर की प्रभारी से पूछताछ की तो वे बोली हम यहां किसी को भी नहीं रख रहे हैं हमारे पास आर्डर हैं। जब उनसे आर्डर की कॉपी मांगी तो वे दे नहीं पाएं। जब इस बारे में जिला कार्यक्रम अधिकारी को बताया तो उन्होंने ड्यूटी चार्ट जारी किया। वहां एक महिला की ड्यूटी लगाई गई ।

मंत्रालय का निर्देश

मंत्रालय से यह भी निर्देश जारी किया गया है कि कोरोना महामारी को देखते हुए कोई महिला यदि सखी सेंटर आती है तो उसके स्वास्थ्य (कोरोना) की जांच की जाए और रिपोर्ट आने तक उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाए।

केस 1.
बिलासपुर से एक पत्रकार संकट में पड़ी एक महिला और उसके दुधमुहे बच्चे के लिए आश्रय ढूंढते रहे, सखी ने उन्हें आश्रय नही दिया और मजबूरन उन्हें उज्ज्वला होम में माँ और बच्चे की व्यवस्था करवानी पड़ी।

केस 2.
दुर्ग कुम्हारी में एक महिला ने 181 पर घरेलू हिंसा की शिकायत करते हुए तत्काल अपने एक वर्षीय दुधमुंहे बच्चे को वापस पाने की गुहार लगाई है जिसे उसका पति छीन ले गया है। पीडि़त ने बताया कि सखी सेंटर और जिला बाल सरंक्षण अधिकारी को फोन किया लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया।

केस 3.
इसी तरह रायपुर के मोवा थाने की पुलिस जब घुमंतू महिला को सखी पहुंचाने गयी तो सखी ने महिला पर सड़ाई करने वाली कहकर और कोरोना संक्रमण का भय दिखाते हुए महिला को आश्रय देने से मना कर दिया । पुलिस ने महिला को आम्बेडकर अस्पताल के दरवाजे तक छोड़ मामले की इतिश्री कर ली।

वर्जन

सखी सेंटर में हम किसी को रूकने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हमने दो लडक़ो की ड्यूटी लगाई है। किसी महिला के मिलने पर हम पहले कोरोना की जांच करते है। हमने काउंसिलिंग बंद कर दी है। आज ही मैं ड्यूटी चार्ट जारी करता हूं।

अशोक पांडे, डीपीओ महिला बाल विकास विभाग

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