एक महीने ‘ब्रेक’ के बाद Vasundhara Raje का Ashok Gehlot सरकार पर निशाना, जानें किस बात से हुई नाराज़?

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने साधा सरकार पर निशाना, युवती को बंधक बनाकर दुष्कर्म करने को बताया शर्मनाक, महिला अपराध पर सरकार के दावों की बताई हकीकत, एक महीने के अंतराल के बाद सरकारी कार्यशैली पर उठाये हैं सवाल, राजे की लंबी सियासी चुप्पी बनी रहती है चर्चा का विषय

 

By: nakul

Published: 25 Nov 2020, 10:53 AM IST

जयपुर।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक महीने के लम्बे अंतराल राज्य की गहलोत सरकार को निशाने पर लिया है। इस बार उन्होंने बारां के अंता में युवती के साथ दुष्कर्म की घटना को आधार बनाते हुए सरकार के महिला सुरक्षा के दावों को कटघरे में रखा है।

राजे ने अपने एक ट्वीट सन्देश में लिखा, ‘राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध की घटनाओं के बीच बारां के अंता में युवती के साथ 14 दिन तक बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का मामला बेहद शर्मनाक है। कांग्रेस सरकार भले ही महिला सुरक्षा के दावे कर रही हो, लेकिन प्रदेश में बेटियों पर अत्याचार की घटनाएं तो थमने का नाम नहीं ले रही है।‘

चर्चा में रहती है लंबी ‘चुप्पी’
राजे की सियासी खामोशी हमेशा से ही चर्चा में बनी रहती है। उनकी चुप्पी को लेकर तो कई बार वे विरोधियों के निशाने पर भी रहती हैं। चुनावी सरगर्मियों के बीच भी वे सरकार विरोधी बयानबाजी से दूर ही रहीं हैं, जबकि प्रदेश भाजपा के अन्य नेता लगभग हर दिन सरकार को अलग-अलग मामलों पर घेरते हुए आरोपों की बौछार करने में सक्रीय हैं।

अलवर मामले में लिया था आखिरी ‘वार’
पूर्व मुख्यमंत्री का सरकार विरोधी ताज़ा बयान लगभग एक महीने के बाद आया है। इससे पहले उन्होंने 26 अक्टूबर को अलवर में सेल्समेन की ज़िंदा जलाकर ह्त्या के मामले पर सरकार पर सवाल उठाये थे।

राजे ने तब कहा था कि करौली में पुजारी को जिंदा जलाने के बाद अलवर में सेल्समैन को डीप फ्रीजर में डालकर हत्या का मामला अमानवीयता के साथ ही कांग्रेस सरकार के कुशासन का एक और नमूना है।

ट्विटर पर एक्टिव राजे
राजे मीडिया से अक्सर दूरी बनाए रखती हैं। फिलहाल सोशल मीडिया के ज़रिये ही उनकी प्रतिक्रियाएं जारी हो रही हैं। ऑफिशियल ट्विटर पर लगभग हर दिन उकी प्रतिक्रियाएं जारी हो रही हैं। लेकिन ज़्यादातर प्रतिक्रियाएं जन्मदिन पर शुभकामना, निधन पर शोक सन्देश, जयंती या पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने और किसी पर्व विशेष पर बधाई देने की ही रहती हैं। सियासी बयानबाजियां या आरोप-प्रत्यारोपों की प्रतिक्रियाएं एक्का-दुक्का ही जारी होती हैं, जो चर्चा का विषय भी बनती हैं।

nakul Desk
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